शामली। बेसिक शिक्षा विभाग में 23 शिक्षकों को नियम विरुद्घ पदोन्नति देने के मामले में जिले में तैनात रही एक डीआईओएस और दो बीएसए पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। मंडलायुक्त के आदेश पर डीएम ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट से मामले की जांच कराई। सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान पदोन्नति मामले में शिथिलता, उदासीनता और लापरवाही बरते जाना सामने आया है। कार्रवाई के दायरे में वित्त एवं लेखाधिकारी भी आ रहे हैं।
कस्बा बनत निवासी भाजपा के जिला उपाध्यक्ष अनुज राणा ने सहारनपुर मंडल के आयुक्त को शिकायती पत्र दिया था। आरोप है कि 2018 में बीएसए कार्यालय के कर्मचारियों ने मिलीभगत कर कुछ शिक्षकों को नियम विरुद्ध पदोन्नति दी गई, जबकि वरिष्ठ शिक्षकों को इस लाभ से वंचित रखा गया। इस मामले की शिकायत उस समय भी की गई थी। जांच में करीब 23 शिक्षकों की पदोन्नति में अनियमितता होने की बात सामने आई थी। आरोप यह है कि उन शिक्षकों की पत्रावली भी उस समय नहीं मिल पाई थी। इसके बाद भी इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मंडलायुक्त के निर्देश पर डीएम जसजीत कौर ने इस प्रकरण की जांच अतिरिक्त मजिस्ट्रेट देवेंद्र सिंह को सौंपी थी। शुक्रवार को जांच अधिकारी देवेंद्र सिंह ने मामले में सभी पक्षों के बयान दर्ज किए। बीएसए गीता वर्मा से भी प्रकरण की जानकारी लेते हुए पदोन्नति संबंधी दस्तावेज देखे। बीएसए का कहना है कि यह प्रकरण उनसे पहले का है, लेकिन अब उनके बीएसए होने के नाते इस प्रकरण से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, जो उन्होंने उपलब्ध करा दिए।
उधर, सूत्रों का कहना है कि जांच अधिकारी ने मामले में तत्कालीन बीएसए चंद्रशेखर, उनके बाद बीएसए का अतिरिक्त कार्यभार देख रहीं तत्कालीन डीआईओएस अनुराधा शर्मा एवं वर्तमान बीएसए गीता वर्मा को प्रकरण में उदासीनता, लापरवाही और शिथिलता के लिए जिम्मेदार माना है। इन तीनों के अलावा वित्त एवं लेखाधिकारी को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। इससे चारों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। उधर, डीएम जसजीत कौर ने बताया कि जांच अधिकारी ने उन्हें रिपोर्ट दे दी है। उन्होंने अभी रिपोर्ट का अध्ययन नहीं किया है।