अल्जाइमर के रोगी को दें अपनेपन का सहारा
शामली। अल्जाइमर रोग अक्सर 60 साल की उम्र के आसपास के लोगों में होता है। शुरूआत में ही इस रोग का पता चल जाए तो उपचार और अपनेपन से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। जिले में भी इस रोग से पीड़ित मरीज चिकित्सक के यहां पहुंच रहे हैं।
अल्जाइमर से पीड़ित किसी भी उम्र के व्यक्ति हो सकते हैं, लेकिन अधिकतर लोग 60 साल की उम्र के आसपास ही इसके शिकार होते हैं। इस रोग के होने की वजह सामाजिक और पारिवारिक समस्याएं, रक्तचाप, मधुमेह, आधुनिक जीवन शैली या सिर में कई बार चोट लगने से भी इस रोग के होने की संभावना बन जाती है। इस रोग से बचाव के लिए शुरूआत से ही खानपान पर ध्यान रखना चाहिए। विटामिन युक्त खानपान और हरे पत्तेदार सब्जियों का सेवन करने से शरीर स्वस्थ रहेगा तो इस रोग के होने की संभावना बहुत कम होगी।
न्यूरोलॉजिस्ट डा. अरुण राय ने बताया कि जिले में अल्जाइमर के केस उनके यहां आते रहते हैं। 15 दिन में एक या दो केस इस तरह का आता है। मरीज उस समय आता है, जब यह रोग पूरी तरह बढ़ चुका होता है। इस रोग का वैसे तो कोई स्थायी इलाज नहीं है। अगर शुरूआत में इस रोग का पता चल जाए तो नियमित जांच उपचार और परिवार का अपनापन मिले तो यह काफी हद तक इस पर काबू पाया जा सकता है।
इस तरह से करें रोगी की पहचान
चिकित्सकों के अनुसार किसी व्यक्ति में अल्जाइमर रोग होने की संभावना दिखे तो उसकी पहचान के लिए उस व्यक्ति से पूछे कि आज कौन सा दिन है कौन सी तारीख है। सुबह नाश्ते में क्या खाया, कहां बैठे हो, सुबह कहां गए थे। अगर व्यक्ति इन सवालों के बारे में नहीं बता पाता तो उसे अल्जाइमर होने की पूरी संभावना होती है। इसकी रोकथाम व उपचार के लिए लिए चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
अल्जाइमर रोग के लक्षण
चीजों को खो देना और ढूंढ न पाना।
रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करने वाली याद्दाश्त की समस्या होना।
- समय का ध्यान न होना।
सामान्य कार्यों को पूरा करने में अधिक समय लेना।
- रंगों में अंतर करने की समस्या होना।
-सामाजिक गतिविधियों से अलगाव होना।
- चिंता बढ़ना, मनोदशा व व्यक्तित्व में बदलाव होना।
- दोस्तों व परिवार के सदस्यों को पहचाने में समस्या होना।
- अनावश्यक रूप से क्रोध आना।
- बेचैनी, उत्तेजना, चिंता, रोना और भटकना।