शामली में गन्ना सहकारी समितियों के अध्यक्षों, चीनी मिलों संगठन और किसान प्रतिनिधियों की बैठक में गन्ना मूल्य 350 रुपये दिए जाने की मांग उठाई गई है।
बृहस्पतिवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राहुल भटनागर की अध्यक्षता वाली बैठक में किसानों के प्रतिनिधियों ने ऊन चीनी मिल का मुद्दा उठाया।
किसानों का तर्क था कि चीनी मिलों का ब्याज समाप्त होने से किसानों का गन्ना मूल्य करने पर गौर नहीं किया जाता है। उत्तर प्रदेश योजना आयोग के सदस्य सुधीर पंवार ने बताया कि पिछले साल की अपेक्षा इस साल गन्नेे का तीस रुपये बढ़ाए जाने की वकालत की है। उन्होंने बताया कि ऊन चीनी मिल पर पिछले साल का बकाया गन्ना मूल्य बकाया है।
किसान मिल गेट पर 52 दिन से बेमियादी धरने पर बैठा है। बकाया गन्ना मूल्य भुगतान न होने से किसान हताश हंै। उन्होंने ऊन चीनी मिल को पेराई सत्र शीघ्र चालू कराए जाने व गन्ने की अगैती, सामान्य प्रजाति में बीस रुपये का अंतर रखा जाने की मांग की है। किसानों ने कहा कि गन्ना भुगतान न होने से उन्हें आर्थिक संकट
से गुजरना पड़ रहा है। मिलों की ओर से कोई आश्वासन नहीं दिया जा रहा है।
पंवार ने बताया कि मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने स्वीकार किया है कि पिछले साल गन्ने का लागत मूल्य 254 रुपये था। इस बार गन्ने की लागत 284 रुपये बैठ रही है, जिससे गन्ना मूल्य बढ़ाए जाने की उम्मीद हैं।
उन्होंने बताया कि आगामी दस दिनो में कैबिनेट की बैठक मुख्य मंत्री अखिलेश यादव इस साल के गन्ना मूल्य घोषित करेंगे। बैठक में प्रदेश की सहकारी गन्ना समितियों के चेयरमैन, किसान प्रतिनिधि संत कुमार मेरठ, चौधरी प्रीतम सिंह गुनार समेत इसमा के सचिव दीपक कुमार, अध्यक्ष सीबी पटौदिया मौजूद रहे।
उधर, जिला गन्ना अधिकारी डॉक्टर अनिल भारती ने बताया कि शीघ्र चीनी मिलों के गन्ना सुरक्षण केंद्रों का निर्धारण किया जाएगा।