शामली। शहर के विद्यालय में एक या दो दिन नहीं बल्कि 22 दिन तक छात्र का शारीरिक शोषण हुआ, मगर विद्यालय प्रशासन को पता ही नहीं लगा। यह सुनकर अजीब सा लगता है। मगर इस पूरे मामले पर यदि नजर डाली जो तो कहीं न कहीं छात्र के शारीरिक शोषण के लिए कुछ हद तक विद्यालय प्रशासन भी जिम्मेदार है।
अमर उजाला की टीम ने पड़ताल की तो पाया कि स्कूल में लगे चार सीसीटीवी जहां पिछले कुछ दिनों से बंद पड़े हैं। वहीं हॉस्टल के अंदर या फिर बाहर कोई सीसीटीवी सुरक्षा की दृष्टि से नहीं लगाया गया। एक सीसीटीवी स्कूल के बाहरी तरफ लगाया गया है। अब मामला संज्ञान में आने के बाद विद्यालय प्रशासन जहां छात्रों को निलंबित और कमेटी गठित कर कार्रवाई का ढोल पीट रहा है। लेकिन सवाल है कि आखिरकार 22 दिन तक मामले का पता विद्यालय प्रशासन को क्यों नहीं लगा। जबकि हर रोज छात्र के साथ मारपीट की जाती थी।
पीड़ित छात्र के पिता के अनुसार, आरोपी छात्रों ने बेटे के साथ 25 जुलाई से लेकर 17 अगस्त तक कुकर्म और मारपीट की घटना को अंजाम दिया। 20 अगस्त को बेटे ने मामले की जानकारी विद्यालय के अध्यापक को दी थी। इसके बाद वह और उनकी पत्नी स्कूल पहुंचे तथा मामले की जानकारी हासिल की। अब सवाल यह उठता है कि जब 20 अगस्त को ही मामले की जानकारी विद्यालय के अध्यापकों को दे दी गई थी तो फिर उसी दिन आरोपी छात्रों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। क्यों उसी दिन रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई।
विद्यालय के प्रधानाचार्य ने भी माना है कि पिछले कुछ दिन से स्कूल के सीसीटीवी कैमरे तेज हवा आदि चलने के कारण बंद पड़े थे। जब सीसीटीवी बंद थे तो फिर उन्हें चालू कराना विद्यालय प्रशासन ने मुनासिब क्यों नहीं समझा।
एक चौकीदार दिन और एक रात में सुरक्षा की दृष्टि से तैनात किया गया है। मगर 22 में से एक दिन भी चौकीदार को छात्र के साथ हुई ज्यादती का पता नहीं लगा। इस प्रकरण में कहीं न कहीं विद्यालय प्रशासन की लापरवाही और अनदेखी भी जिम्मेदार है। नियमित रूप से छात्रों और हॉस्टल की मॉनिटरिंग की जाती तो छात्र शारीरिक शोषण का शिकार नहीं होता।
- वार्डन भी तैनात नहीं
विद्यालय में कोई वार्डन भी तैनात नहीं किया गया है। प्रधानाचार्य ने कहा कि शिक्षकों को वार्डन का चार्ज सौंपा गया है। इसके अलावा चौकीदार भी तैनात किए गए हैं। उनसे भी पूछताछ की जाएगी।
- एक कमरे में रहते हैं 35 बच्चे
विद्यालय की बात की जाए तो यहां पर 365 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। हॉस्टल के एक रूम में 35 से लेकर 40 बच्चों को रखा जाता है। छात्रों का कहना है कि विद्यालय में हाॅस्टल के कमरों की संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए। कमरे में भीड़ अधिक होने के कारण छात्रों के साथ मारपीट की संभावना बनी रहती है।
- प्रधानाचार्य बोले- सीसीटीवी बढ़ाएंगे
विद्यालय प्रशासन खराब पड़े सीसीटीवी को तो चालू कराने की तरफ ध्यान नहीं दे रहा। अब घटना के बाद सीसीटीवी बढ़ाने की बात कही है। प्रधानाचार्य का कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटना नहीं हो, इसके लिए स्कूल में और भी सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इसके अलावा छात्रों को जागरूक किया जाएगा कि कोई भी घटना होने पर तुरंत उन्हें बताएं। विद्यालय में काउंसिलिंग टीम भी गठित की जाएगी।
- इन सवालों के कौन देगा जवाब
: जब विद्यालय में सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े थे, तो फिर उन्हें ठीक क्यों नहीं कराया गया।
: हॉस्टल में सीसीटीवी क्यों नहीं लगाए गए हैं
: क्या दो चौकीदार पूरे स्कूल की निगरानी के लिए काफी है
: 20 अगस्त को शिकायत के बावजूद तुरंत मामला दर्ज क्यों नहीं कराया गया।
: पूर्व में हुई मारपीट के मामले में विद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई क्यों नहीं की