कैराना। नवसृजित ऊन तहसील के सरकारी आवासों के लिए अधिग्रहित भूमि का विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया। काफी समय से जमीन पर काबिज लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका डाली, जिस पर हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।
अधिवक्ता सत्यपाल सिंह ने बताया कि ऊन में खसरा नंबर 1205 की साढ़े 10.5 बीघा जमीन हरिजन बस्ती के लिए आरक्षित है। उक्त जमीन पर वीरेंद्र सिंह आदि का कब्जा चला आ रहा है। ऊन को नई तहसील बनाने पर प्रशासन ने उक्त जमीन को आवासों के लिए अधिग्रहित किया था। जिस पर वीरेंद्र सिंह ने कैराना सिविल जज जूनियर डिविजन की कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिसे कोर्ट ने लंबी बहस के बाद 11 सितंबर को स्वीकार कर लिया था।
उन्होंने बताया कि इसके बाद वीरेंद्र सिंह आदि ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ता बीएस यादव के माध्यम से रिट दायर की थी। जिस पर हाईकोर्ट की पीठ नंबर 30 में सुनवाई चल रही थी। मामले में सात अक्तूबर को न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल ने आदेश जारी किए। जिसमें कहा गया कि खसरा नंबर 1205 की जमीन हरिजन बस्ती के लिए आरक्षित होने के कारण विरेंद्र सिंह आदि को जमीन से बेदखल न किया जाए।
उत्तर प्रदेश सरकार, कमिश्नर सहारनपुर, डीएम शामली व तहसीलदार ऊन को 29 अक्तूबर को पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया गया है।