बाबारी क्षेत्र के गांव हिरनवाडा में भागवत कथा करते कथा वाचक
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बाबरी। हिरनवाड़ा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा शनिवार को समापन हो गया। कथावाचक विजेंद्र शास्त्री ने कृष्ण सुदामा की मित्रता का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान का दूसरा रूप मित्रता है।
कथावाचक विजेंद्र शास्त्री ने कहा कि जब सुदामा अत्यंत गरीब के दौर से गुजर रहा था, तब उसकी पत्नी ने सुदामा से कहा कि आपका मित्र श्रीकृष्ण जो द्धारिकाधीश है, आप उन्हीं के पास जाकर कुछ मदद लें। इस पर सुदामा ने अपने फटे हाल में ही अपनी पत्नी की बात मानते हुए द्धारिका नगरी पहुंच गए, जहां पर द्धारिकावासियों ने सुदामा को फटे हाल में देखकर आपस में कहा कि यह कोई परदेशी है। वह अत्यंत निर्धन है, जबकि द्धारिका नगरी में तो इस प्रकार का कोई निर्धन व्यक्ति हो नहीं सकता। शायद कोई ब्राह्मण है, तभी सुदामा अपने मन में कृष्ण कृष्ण पुकारते आगे बढ़ रहा था। द्धारिका वासियों के पूछने पर सुदामा ने कहा कि मुझे श्री कृष्ण के घर जाना है। द्धारिका वासियों को आश्चर्य हुआ कि एक इतना निर्धन व्यक्ति श्री कृष्ण से क्यों मिलना चाहता है, इस पर सुदामा ने कहा कि श्रीकृष्ण मेरे परम मित्र हैं। मुख्य द्वार पर तैनात सैनिक ने सुदामा के आने का संदेश में श्रीकृष्ण तक पहुंचाया, तो सुदामा का नाम सुनते ही श्रीकृष्ण बेचैन हो गए। नंगे पांव ही दौड़ कर सुदामा-सुदामा पुकारते हुए अपने महल से बाहर निकल पड़े। आगे चलकर उन्होंने सुदामा को मित्र-मित्र पुकारा तथा सुदामा को अपनी बाहों में भर लिया। आंखों में आंसू आ गए, तभी द्वारपालों को कहा कि मेरे मित्र के आने की खुशी में उनके भव्य स्वागत की तैयारी की जाए। द्धारिका वासियों ने जब भगवान श्री कृष्ण व दरिद्र ब्राह्मण की दोस्ती को देखा, तो कहने लगे कि मित्रता भगवान का दूसरा रप है। कथा सुनने वाले श्रोताओं की भीड़ ने तालियां बजाते हुए कथावाचक का भव्य स्वागत किया। कथा के समापन समारोह के दौरान कथा वाचक विजेंद्र कश्यप ने ग्राम वासियों से नशा, मास, चोरी आदि छोड़ने व बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संकल्प लिया।
बाबरी क्षेत्र के गांव हिरनवाडा में कथा सुनती महिलाऐ- फोटो : SHAMLI