शामली। थानाभवन विधानसभा सीट पर सपा ने जाट बिरादरी के डाक्टर सुधीर पंवार को टिकट देकर 45 साल का इतिहास बदल दिया। लंबे अरसे से इस सीट पर किसी भी पार्टी ने जाट को टिकट नहीं दिया था, जबकि इस सीट पर जाट बिरादरी के वोटों की संख्या करीब 40 हजार से ज्यादा है। हार और जीत में जाटों की भागीदारी रही, मगर विधायक बनने का मौका नहीं मिला।
थानाभवन सीट के इतिहास पर गौर करें तो सन 1962 से लेकर अब तक यहां पर तमाम पार्टियों के द्वारा प्रत्याशी घोषित किए गए। 1974 के बाद तीन बार सपा, दो बार भाजपा ने जीत दर्ज की। इसके साथ ही एक बार रालोद भी यहां से विजयी रही। पार्टियों ने यहां पर अपने-अपने गणित के अनुसार ठाकुर, कश्यप और मुस्लिम तथा वैश्य, सैनी पर विश्वास जताया और यहां से ज्यादातर इन्हीं को टिकट देकर चुनाव लड़ा।
1967 के विधानसभा चुनाव में जनसंघ द्वारा इस सीट पर जाट बिरादरी के ओमप्रकाश को प्रत्याशी बनाया था। उसके बाद से किसी भी दल ने जाट बिरादरी के व्यक्ति को प्रत्याशी घोषित नहीं किया। इस बार के विधानसभा चुनाव में में भी भाजपा ने सुरेश राणा, बसपा ने अब्दुल वारिस, रालोद ने जावेद राव को प्रत्याशी बनाया है। सपा ने किरणपाल का टिकट काटकर डाॅ. सुधीर पंवार को प्रत्याशी बना दिया।
सपा ने जाट बिरादरी का प्रत्याशी उतारकर नया समीकरण साधा है। इस दांव का सपा को कितना लाभ होगा यह तो भविष्य के गर्भ में है। वहीं, सपा की चाल पर रालोद, भाजपा और बसपा नेताओं की भी निगाहे हैं। क्योंकि हर राजनीतिक दल ने जातीय समीकरणों को साधने के लिए अपने अपने आंकड़े बैठाए हुए हैं।
मुस्लिम को प्रत्याशी बनाने वाली रालोद का प्रयास रहेगा कि जाट और मुस्लिम गठजोड़ का फायदा लिया जाए, तो भाजपा सहित अन्य दलों की रणनीति सपा के टिकट बदलने पर कश्यपों को अपनी ओर करने तथा जाट प्रत्याशी होने के कारण रालोद के परंपरागत वोटरों में बिखराव का फायदा लेने की हो सकती है। अब देखना यह है कि दिन प्रतिदिन बदल रहे समीकरण में किसकी रणनीति कामयाब होती है और किसे पछताने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।