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सिपाही ने मारा धक्का, गर्भवती महिला बेहोश

Tue, 29 Nov 2016 12:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
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revel - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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झिंझाना। नोटबंदी को लेकर बैंकों के बाहर लगी लोगों की भीड़ कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। बैंकों पर तैनात पुलिस कर्मियों पर रुपये लेकर लोगों को अंदर भेजने का आरोप लग रहा है। वहीं, एक पुलिस     कर्मी कि हठधर्मिता के चलते सोमवार को लाइन में लगी गर्भवती महिला बेहोश हो गई। 
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कस्बे के पंजाब नेशनल बैंक के बाहर दो दिन की छुट्टी के बाद सोमवार को पहले दिनों से ज्यादा भीड़ रही। शुक्रवार को ही बैंक ने ग्राहकों को टोकन नंबर दे दिया था, लेेकिन सोमवार को उन्हें भी कैश नहीं मिला। लोगों का आरोप है कि उन्हें सोमवार को जो टोकन दिया गया था, उसके अनुसार उनका नंबर बैक खुलने के आधा घंटा बाद आना था।

लेकिन वहां तैनात पुलिसकर्मी ने देर से आए लोगों से 100-100 रुपये लेकर उनसे पहले बैंक में घुसा दिया। इसी अफरा तफरी में लाइन में लगी गर्भवती महिला नाजमा पत्नी खुर्शीद निवासी मोहल्ला सैदमीर जमीन पर गिर गई। पेट में चोट लगने पर वह बेहोश हो गई। उसे तुरंत चिकित्सक के यहां पहुंचाया गया।
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महिला का आरोप है कि पुलिस वाले ने उसे धक्का देकर पीछे किया था। इसी अफरा तफरी में वह जमीन पर जा गिरी। बाद में बैक कर्मियों ने उसे चिकित्सक के यहां से ले जाकर बैंक के अंदर बैठाकर कर कैश दिया। बैंक प्रबंधक सुनील कुमार ने बताया कि टोकन नंबर से लोगों को बैंक में घुसाने कि जिम्मेदारी पुलिस की है। अगर लाइन में लगे लोगों को कैश नहीं मिला तो पुलिस कर्मियों की कमी है।

बैंक खुलते ही लगा दिया नो कैश का बोर्ड  
थानाभवन। दो दिन की छुट्टी के बाद खुले बैंकों ने सोमवार को भी ग्राहकों को कैश नहीं मिल सका। घंटों लाइनों में लगने के बाद भी ग्राहकों को निराशा ही मिली। वहीं कस्बे में लगे तीनों एटीएम शो पीस बने रहे। शनिवार, रविवार को अवकाश रहने के पश्चात सोमवार को कस्बे की ओबीसी, पीएनबी, भारतीय स्टेट बैंक,  यूनियन बैंक के सामने ग्राहकों की लंबी लाइनें लग गई थीं। दो दिन का अवकाश रहने के कारण सोमवार को प्रत्येक बैंक के सामने भारी भीड़ रही।

ग्राहकों को उस समय निराशा हुई जब ओबीसी बैंक के खुलते ही नकदी न होने का नोटिस चस्पा कर दिया। यही हाल भारतीय स्टेट बैंक का रहा। जहां आठ दस लोगों को पैसा देने के पश्चात नो कैश का नोटिस लगा दिया गया। पीएनबी ने दोपहर एक बजे तक पैसा दिया। यही हाल यूनियन   बैंक का रहा, बैंकों से नकदी न मिलने पर निराश लोगों ने हंगामा भी किया, लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकला। 
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