फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: 58 की उम्र में ऐसा हौसला, हर किसी को कर देगा प्रेरित, मत्सय पालन से लाखों रुपये कमाती हैं श्यामो देवी

Wed, 27 Sep 2023 06:48 PM IST
मेरठ ब्यूरो महबूब अली, संवाद न्यूज एजेंसी, शामली

सार

Amar Ujala Special Report : 58 वर्षीय श्यामो देवी और सुनीता देवी रसोई संभालने के साथ-साथ मछली पालन कर छह महीने में करीब तीन लाख रुपये कमा रही हैं। खास बात यह है कि श्यामो देवी अन्य लोगों को भी प्रेरित कर रही हैं।
विज्ञापन
इस्सोपुर टील गांव में मछलियों को फीड डालती किसान श्यामो देवी। संवाद - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मन में यदि कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो उम्र भी आड़े नहीं आती। शामली में इस्सोपुर टील की रहने वाली 58 वर्षीय श्यामो देवी और सुनीता देवी रसोई संभालने के साथ-साथ बायोफ्लॉक विधि से मछली पालन कर हर छह माह में दो से लेकर तीन लाख रुपये तक की आमदनी कर रही हैं। यही नहीं अन्य लोगों को भी मछली पालन के टिप्स देते हुए कई को रोजगार भी दे रही हैं।

विज्ञापन


इस्सोपुर टील निवासी श्यामो देवी ने बताया कि करीब तीन साल पूर्व ही उनके यहां पर मत्सय पालन विभाग द्वारा कार्यशाला आयोजित की गई थी, जिसमें कम जमीन वाले किसानों को मत्सय पालन के प्रति प्रेरित किया गया। वह प्रेरित हुई और उसने करीब ढाई बीघा जमीन में तालाब स्थापित कराने के बाद पश्चिम बंगाल से पंगेसियस मछली का बीज लाकर पालन शुरू किया। हालांकि, एक सीजन में नुकसान हुआ।

इसके बाद भी हिम्मत नहीं हारी और बायोफ्लॉक विधि से मछली पालन शुरू किया। अब हर छह माह में दो से लेकर तीन लाख रुपये तक की आमदनी आसानी से की जा रही है। तीन अन्य को भी रोजगार दिया हुआ है। उनके अनुसार, सुबह और शाम रसोई संभालती हूं। बचे समय में मछली पालन किया जाता है।
 

इसके अलावा गांव की ही सुनीता देवी पत्नी नरेश कुमार भी तीन साल से बायोफ्लाॅक विधि से मछली पालन कर मुनाफा कमा रही हैं। सुनीता के पति नरेश कुमार किसान हैं और पत्नी का मछली पालन में सहयोग करते हैं। बताया कि मछली तैयार करने के बाद दिल्ली की मंडी में भेजी जाती है। अन्य लोगों को भी निशुल्क मछली पालन के टिप्स दिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार डॉ. केवी राजू और मत्सय पालन विभाग के सहायक निदेशक राजेलाल भी मत्सय पालन करने वाली महिलाओं की सराहना कर चुके हैं। महिला किसानों को सम्मानित भी किया जा चुका है।

जिले में नहीं है मछली मंडी, दिल्ली होती है मछलियों की सप्लाई
किसान श्यामो देवी और सुनीता का कहना है कि शामली में मछली मंडी नहीं है, जिसके कारण यहां पर पाली गई मछलियों को ठेकेदार के माध्यम से दिल्ली भेजा जाता है। यदि शामली में मछली मंडी शुरू करा दी जाए तो यहां पर मछली पालकों की संख्या बढ़ेंगी, वहीं कम जमीन वाले किसान अधिक मुनाफा ले सकेंगे।

किसानों को किया जा रहा जागरूक
मत्सय पालन विभाग के सहायक निदेशक राजेलाल का कहना है कि मछली पालने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। किसानों को विभिन्न गांव-गांव में जाकर जागरूक भी किया जा रहा है।

जानिए.. कैसे होता है बायोफ्लाॅक विधि से मछली पालन
राजेलाल के अनुसार, बायोफ्लॉक तकनीक में बायोफ्लॉक नाम के एक बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक में सबसे पहले मछलियों को सीमेंट या मोटे पॉलिथीन से बने टैंक में डाला जाता है। फिर मछलियों को खाना दिया जाता है। मछलियां जितना खाना खाती हैं, उसका 75 प्रतिशत मल के रूप में शरीर से बाहर निकाल देती हैं। फिर बायोफ्लॉक बैक्टीरिया इस मल को प्रोटीन में बदलने का काम करता है। जिसे मछलियां खा जाती हैं। जिससे उनका विकास बहुत तेजी से होता है।

यह भी पढ़ें: मेरठ: बाइक में तमंचा रखते सीसीटीवी में कैद हुआ सिपाही, युवक को थाने में बैठाया, परिजनों का IG दफ्तर पर हंगामा

बायोफ्लॉक तकनीक में लागत
अगर कोई मछली पालक 10 हजार लीटर क्षमता की एक टैंक बनवाता है, तो बनवाने की लागत 32 से 35 हजार रुपये आती है। जिसका लगभग पांच सालों तक इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर कोई मछली पालक 25-30 हजार की लागत लगाकर इसमें मछली पालन करता है, तो उसे लगभग छह महीने में तीन से चार क्विंटल मछलियां मिल जाती हैं।

यह भी पढ़ें: यूपी: थप्पड़ कांड के बाद मेरठ में शिक्षक पर बच्चे की चोटी काटने का आरोप, हिंदू संगठनों में रोष, पंचायत
विज्ञापन

बायोफ्लॉक तकनीक के फायदे, किसान श्यामो देवी के अनुसार...
काम लागत, सीमित जगह एवं अधिक उत्पादन।
चार महीने में केवल एक ही बार पानी भरा जाता है।
गंदगी जमा होने पर सिर्फ 10% पानी निकालकर इसे साफ रखा जा सकता है।
अनुउपयोगी जगह एवं कम पानी का उपयोग।
मजदूरों की लागत कम।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें