जम्मू काश्मीर के श्रीनगर में नौ साल तक डल झील पर प्रदीप की तैनाती रही। तेरहवीं में पहुंचे शहीद प्रदीप के दोस्त सुधीर ने बताया कि वह अपने बेटे सिद्धार्थ को सीए बनाने के लिए बातें करता रहता था।
लिलौन निवासी सुधीर और प्रदीप बनत आपस में गहरे दोस्त रहे। वीवीपी कालेज में साथ-साथ पढ़े। सुधीर बताते हैं कि वर्ष 2003 में प्रदीप सीआरपीएफ और सुधीर की सेना में भर्ती हुई। सुधीर सेना में एजूकेशन विभाग में और प्रदीप कांस्टेबल पद पर था। सेना में जोधपुर से अवकाश पर आए सुधीर बताते हैं कि प्रदीप की तैनाती नौ साल जम्मू के श्रीनगर में डल झील पर थी। तीन माह पूर्व प्रदीप मेडिकल का प्रशिक्षण लेकर लौटा था। 13 फरवरी को वह छुट्टी पूरी कर जम्मू में 30 किमी दूर ट्रांजिट कैप जा रहे थे। सुधीर बताते हैं कि फरवरी में ही प्रदीप से बात हुई थी। वह अपने बेटे सिद्धार्थ को सीए बनाने की बातें अक्सर करता रहता था।
घर से महिलाओं के विलाप की आती रही आवाजें
शामली। शहीद प्रदीप की तेरहवीं में मां सुलेंता देवी, सास मिथलेश देवी और पत्नी शर्मिष्ठा गमजदा थीं। घर में पूरे दिन प्रदीप की याद में महिलाओं की रोने की आवाज आती रही। परिजनों ने बताया कि प्रदीप के बच्चे और परिवार गाजियाबाद में रहता था। ससुर मोहकम सिंह यूपी पुलिस में निरीक्षक से सेवानिवृत्त हुए, जो गाजियाबाद में रहते हैं।
बच्चों की परीक्षा के लिए तीन दिन में कर दी तेरहवीं
प्रदीप की तेरहवीं बच्चों की परीक्षा के मद्देनजर समय से पूर्व तीन दिन में करा दी गई। प्रदीप के भाई आईटीबी के जवान उमेश कुमार ने बताया कि बच्चों की सीबीएसई परीक्षा के मद्देनजर तेरहवीं में करनी पड़ी।