फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जरूरत के समय यूरिया की किल्लत, किसान परेशान

विज्ञापन
शामली के नई मंडी स्थित इफको के खाद बिक्री केंद्र पर यूरिया लेने आए किसान। - फोटो : SHAMLI
विज्ञापन
शामली। लॉकडाउन में कुछ किसानों को ज्यादा खाद दे देने के बाद अब जिले में यूरिया का संकट गहरा गया है। जिले की ऊन, गढ़ीपुख्ता, बाबरी और कैराना समेत कई समितियों से किसानों को खाद नहीं मिल रहा है। जहां खाद उपलब्ध है वहां पर भी कमी के चलते चार से पांच बोरे ही किसानों को दिए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस समय गन्ने और धान को यूरिया की आवश्यकता है, लेकिन खाद नहीं मिलने से फसल प्रभावित हो रही है।
विज्ञापन

मंडी में स्थित इफको खाद गोदाम पर करीब 100 बैग का ही स्टॉक है। एक किसान को पांच कट्टे ही दिए जा रहे हैं। गोहरनी के किसान ओमप्रकाश ने बताया कि उसे ज्यादा यूरिया की आवश्यकता थी लेकिन पांच बैग से ज्यादा नहीं दिए जा रहे। उधर, बाबरी में रायपुर और महावतपुर सहकारी समितियों पर खाद नहीं मिलने पर भारतीय किसान संघ के प्रांतीय मंत्री दुष्यंत पुंडीर ने डीएम जसजीत कौर और एआर कोऑपरेटिव राजवीर सिंह से फोन पर वार्ता की। उन्होंने जल्द ही खाद उपलब्ध कराने की मांग की है। रायपुर व महाबतपुर सहकारी समिति के प्रभारी तरुण राणा का कहना है कि खाद खत्म गया है। महाबतपुर से 31 जुलाई व रायपुर से 20 अगस्त चेक भेजे गए थे, लेकिन खाद की आपूर्ति नहीं हुई।
------------
करीब एक सप्ताह से क्षेत्र में यूरिया की कमी
कैराना। पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र के सहकारी समितियों पर यूरिया की किल्लत से किसान परेशान हैं। कैराना क्षेत्र के ऊंचागांव, भूरा, खुरगान व कंडेला सहकारी समिति पर यूरिया का स्टाक शून्य है। किसान आरिफ उर्फ भूरा और महबूब निवासी मन्ना माजरा ने बताया कि गन्ने के लिए यूरिया की जरूरत है। भूरा सहकारी समिति पर खाद नहीं मिली। भूरा सहकारी समिति के सचिव सोमपाल ने बताया कि 15 दिन पहले यूरिया का स्टाक आया था, लेकिन बाद में आपूर्ति नहीं हुई। समिति के पास यूरिया का एक भी बोरा नहीं है। ऊंचागांव सहकारी समिति के चेयरमैन जगदीश चौहान ने बताया कि दो दिन पहले उनकी समिति पर यूरिया खत्म हो गया था।
विज्ञापन

----------
समितियों से भेज दिए गए चेक, नहीं हुई आपूर्ति
ऊन/गढ़ीपुख्ता। ऊन के किसान कंवरपाल, विकास आदि ने बताया कि एक पखवाड़े से साधन सहकारी समिति ऊन पर यूरिया नहीं है। निजी खाद विक्रेता भी किसान को दो बैग से ज्यादा नहीं दे रहे हैं और यूरिया के साथ महंगी दवाई भी देते हैं। ऊन समिति के सचिव संदीप कुमार ने बताया कि यूरिया उपलब्ध नहीं है। एडीओ सहकारिता मुकेश कुमार का कहना है कि एक-दो दिन में रैक आने की उम्मीद है। ऊन क्षेत्र के गांव हथछौया की सहकारी समिति में एमडी संदीप कुमार ने बताया कि 17 अगस्त को 400 बैग यूरिया आया था। उपलब्धता नहीं है, यूरिया के लिए चेक भेज दिए गए हैं। गढ़ीपुख्ता की सहकारी समिति के एमडी बबलू कुमार ने बताया कि 3.71 प्रतिशत यूरिया गोदाम में बच रहा है। नई रैक के लिए चेक भेज दिए गए हैं।
-----------
बोले किसान...
भंदौडा निवासी किसान संजय शर्मा ने बताया कि दो सप्ताह पूर्व अमरूद के 800 पौधे छह बीघा जमीन में लगाए हैं। यूरिया की आवश्यकता है लेकिन मिल नहीं रहा।
-----------
हिरनवाड़ा निवासी किसान विपिन ने बताया कि पछेती गन्ने की फसल के लिए पांच बैग यूरिया की जरूरत है लेकिन समिति पर खाद नहीं मिली।
--------
हथछौया के किसान सोम तोमर का कहना है कि इस बार यूरिया की कमी होने से फसलों में सही समय पर नहीं डाला गया। सोसायटी से कम खाद मिला है। कुछ दुकान से खरीदना पड़ा।
---------
गांव हथछौया के किसान बिट्टू तोमर ने बताया कि उन्हें यूरिया की आवश्यकता थी, तो समिति पर खत्म हो गया था। दुकान से खरीदकर डालना पड़ा।
-------
बोले अधिकारी...
जिले में यूरिया की कमी नहीं है। अप्रैल से अगस्त तक 7952 मीट्रिक टन के सापेक्ष 13 हजार 10 मीट्रिक टन यूरिया बिक चुका है। यह लक्ष्य का 163 प्रतिशत है। वतरय़्मान में जिले में 1372 मीट्रिक टन की उपलब्धता है। जिन समितियों से सूचना मिल रही है वहां खाद भेजा जा रहा है। - राजवीर सिंह, एआर कोऑपरेटिव
--------
बिक्री केंद्रों पर यूरिया के स्टॉक की जांच कराई जाएगी। जिला कृषि अधिकारी को निर्देश दिए जा रहे हैं कि वह जांच कराकर पता लगाएं कि यूरिया की कमी का क्या कारण है। - जसजीत कौर, डीएम, शामली।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें