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Shamli: ये कैसा ऑपरेशन... नवजात की मौत, कभी मां नहीं बन सकेगी महिला, कोर्ट ने डॉक्टर को दिया ये आदेश

Wed, 28 May 2025 08:33 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, शामली

सार

झिंझाना की शहजादी ने न्यायालय में बहल नर्सिंग होम की महिला चिकित्सक अनुपमा बहल और मुकेश नर्सिंग होम के डॉ. मुकेश गर्ग के विरुद्ध परिवाद दायर कराया था। जिस पर फैसला सुनाया गया। 
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सांकेतिक तस्वीर।
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विस्तार
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न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने महिला की डिलीवरी के दौरान लापरवाही से ऑपरेशन करने और सही उपचार न देने पर आदेश सुनाया है। इसके तहत निजी महिला चिकित्सक पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। 
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कस्बा झिंझाना निवासी शहजादी पत्नी हारून ने आयोग में शामली के कैराना रोड गगन विहार स्थित बहल नर्सिंग होम की महिला चिकित्सक अनुपमा बहल, असिस्टेंट रवि, नर्स उर्मिला, मुकेश नर्सिंग होम के डॉ. मुकेश गर्ग के विरुद्ध 18 दिसंबर 2017 को परिवाद दायर कराया था। 
 

शहजादी ने बताया था कि 13 जनवरी 2017 को बहल नर्सिंग होम में ठीक उपचार देने और सही तरीके से डिलीवरी करने का वायदा करके भर्ती कर लिया था। उसी दिन लापरवाहीपूर्ण तरीके से उसका ऑपरेशन कर दिया, जिसमें उसने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन ठीक उपचार न करने के कारण छह दिन बाद नवजात की मृत्यु हो गई।
 

शहजादी ने कहा कि ठीक उपचार न करने के कारण उसके पूरे शरीर में संक्रमण फैल गया, लेकिन विपक्षी ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया और एक लाख रुपये ले लिए। इसके बाद परिजन उसे 18 जनवरी 2017 को मुकेश नर्सिंगहोम ले गए। इस नर्सिंग होम में उसे आठ-नौ दिन उपचार दिया, लेकिन डाक्टर मुकेश गर्ग ने न तो उसे रेफर किया और न ही संतोषजनक उपचार दिया, बल्कि उसके जीवन से खिलवाड़ करते रहे, जो दोषपूर्ण सेवा में आता है।
 

परिजनों ने नाजुक हालत में बिना रेफर किए ही सात फरवरी 2017 को पं. बीडी शर्मा पीजीआईएमएस रोहतक हरियाणा में भर्ती कराया। लगभग चार महीने उपचार के बाद कुछ आराम मिला। वहां के डाक्टर ने बताया कि लापरवाही पूर्ण ऑपरेशन के कारण वह भविष्य में गर्भधारण नहीं कर सकती और यदि गर्भधारण कर लिया तो उसकी मृत्यु हो सकती है। उसके पास चार वर्ष का एक पुत्र है।
 

आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने महिला चिकित्सक डॉ. अनुपमा बहल और डॉ. मुकेश गर्ग के विरुद्ध परिवाद स्वीकार किया और असिस्टेंट रवि व नर्स उर्मिला के विरुद्ध निरस्त कर दिया। आयोग ने महिला चिकित्सक अनुपमा बहल को मानसिक, आर्थिक और शारीरिक क्षतिपूर्ति के दो लाख रुपये और डॉ. मुकेश गर्ग को 50 हजार रुपये और दोनों को वाद खर्च के 10 हजार रुपये परिवादी को अदा करने के लिए आयोग में जमा करने का आदेश सुनाया। 
 

साथ ही महिला चिकित्सक द्वारा सेवा में कमी और घोर लापरवाही एवं उपेक्षा करने के लिए दो लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया। अर्थदंड की धनराशि वादी को देय न होकर नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी।
 
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आयोग ने आदेश में यह टिप्पणी की 
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने अपने आदेश में कहा कि महिला चिकित्सक द्वारा परिवादी के इलाज में गंभीर लापरवाही व उपेक्षा की गई है, जिससे उसे आर्थिक, मानसिक और शारीरिक क्षति पहुंची और वादी भविष्य में मातृत्व सुख से भी वंचित हो गई है। 
डॉ. मुकेश यह जानते हुए कि परिवादी की स्थिति गंभीर है, उसके बावजूद उसे हायर सेंटर न भेजकर स्वयं लापरवाही से दस दिन तक इलाज किया, जिस कारण वादी की स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।

 
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