पूरी नहीं हुई फोरलेन की आस, रेलवे के दोहरीकरण का भी इंतजार
शामली। केंद्र सरकार की दूसरी पारी का एक साल पूरा हो गया है। इस एक साल में केंद्र सरकार ने कई सख्त फैसले लिए। अधिकांश लोग उनसे सहमत भी हैं, लेकिन विकास के मामले में जिले की दो बड़ी उम्मीदें अभी तक पूरी नहीं हुई है। रेलवे लाइन के दोहरीकरण और दिल्ली-सहारनपुर फोरलेन बाईपास के शामली वासियों के सपने केंद्र सरकार इस साल भी पूरे नहीं कर सकी। हालांकि लोगों ने धारा 370 हटाने सहित केंद्र सरकार केकई फैसलों को देशहित में बताया है। पेश है अमर उजाला की रिपोर्ट -
रेललाइन दोहरीकण में सिर्फ आश्वासन मिले
वर्ष 2016 के रेलबजट में 1500 करोड़ का प्रावधान हुआ था। इसमें दोहरीकरण और विद्युतीकरण होता था। वर्ष 2019 में 1210 करोड़ का डीपीआर बना था। ये फाइल रेलवे के चेयरमैन के यहां पास होने गई है, लेकिन अभी तक ये लंबित है। इसके लिए शहर शहरवासी प्रयासरत हैं। अग्रवाल मित्र मंडल के सचिन अनुज अग्रवाल, व्यापारी नेता घनश्याम दास गर्ग भी इस फाइल को पास कराने के लिए लगे हुए हैं। व्यापारी नेता सांसद, रेलमंत्री तक से मिल चुके हैं, लेकिन आश्वासन मिले दोहरीकरण का अभी भी लोगों का इंतजार है। पूर्व सांसद रहे हुकुम सिंह ने मेरठ-पानीपत नई रेललाइन परियोजना मंजूर कराई थी। ये परियोजना अब लुप्त ही हो गई है।
..आखिर कब तक पूरा होगा फोरलेन
इसी तरह कई साल से दिल्ली-सहारनपुर हाईवे काम सालों से चल रहा है। इसके पहले चरण में बागपत तक निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन शामली को अभी भी फोरलेन नहीं मिला है। हालांकि एलम, कांधला तक सड़क बन चुकी है। कांधला में सड़क किनारे नाला बन रहा है, लेकिन अभी शामली शहर को इसका इंतजार है। लॉकडाउन की वजह से भी ये काम प्रभावित हुआ है।
तीन तलाक को सपोर्ट, सीएए के खिलाफ
शहर निवासी शीबा खान कहती हैं केंद्र सरकार ने तीन तलाक पर कानून बनाया। ये महिलाओं के हितों के लिए काम हुआ। वह इस कानून के पक्ष में हैं, लेकिन सीएए कानून से वह सहमत नहीं हैं।
अब सुरक्षित महसूस करती हैं लड़कियां
केंद्र सरकार का तीन तलाक कानून बनाना महिलाओं के हित में अच्छा फैसला है। कश्मीर में धारा 370 हटाने का कदम उचित है। वैसे केंद्र और प्रदेश दोनों ही सरकारों ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए बेहतर काम किया है। अब लड़कियां निडरता से घर से निकलती हैं।
कोमल सिंह, ताइक्वांडो ट्रेनर
ये एक साल पिछले पांच साल पर भारी
केंद्र सरकार ने इस एक साल ते फैसले पिछले कार्यकाल के पांच सालों के फैसले पर भारी हैं। आतंकवाद की जड़ अनुच्छेद 370 खत्म हुआ। सीएए कानून के अलावा महिलाओं के हित के लिए तीन तलाक कानून बनाया। कोविड -19 का दौर जरूर चुनौतियों भरा रहा, लेकिन इसमें भी केंद्र ने कई अच्छे फैसले लिए और सभी की सोची।
निर्मला मलिक, प्रधानाचार्या
व्यापारी कल्याण बोर्ड अच्छा कदम
सरकार ने व्यापारियों के हित के कई कार्य किए। व्यापारी कल्याण बोर्ड बनाया। एक देश एक टैक्स की व्यवस्था को प्रभारी ढंग से लागू किया। जीएसटी फार्म सरल किए और व्यापारियों को काफी सुविधा हुई। इसके दूूरगामी परिणाम भी आएंगे।
अनिल गोयल ,पुस्तक विक्रेता
आश्वासन मिले, नहीं हुआ दोहरीकरण
रेलवे लाइन के दोहरीकरण और विद्युतीकरण के लिए हम तीन साल से प्रयारसत हैं। इसके बाद भी दोहरीकरण को लेकर रेलवे गंभीर नजर नहीं आ रहा।
अनुज बंसल, सचिव अग्रवाल मित्र मंडल
उद्योगों के लिए अभी बहुत कुछ सोचने की जरूरत
मोदी सरकार ने उद्यमियों के लिए काफी प्रयास किए। कोराना काल में भी उद्योगों को पैकेज दिया। उद्यमियों के लिए अभी और बहुत कुछ करने की जरूरत है।
निर्मल जैन, उद्यमी
परेशान है आज का किसान
पीएम ने चुनावी रैलियों में किसानों के लिए बहुत कुछ कहा, लेकिन इस एक साल में मिला कुुछ नहीं। मिलों से किसानों को गन्ना भुगतान नहीं मिल रहा। किसान को सब्जी के उचित दामनहीं मिल रहे। वो सब्जी नष्ट करने को मजबूर है। पशुपालकों का दूध मंदा हो गया डेरियों का दूध महंगा हो रहा है। किसान बहुत परेशान है।
अनिल मलिक ,किसान नेता
किसान परेशान
लॉकडाउन में किसान खेती, मजदूर, व्यापारी सब परेशान हैं। कोरोना से बचाव के सरकारी तरीकों की आलोचना हो रही है। सरकारी पैकेज से कोई लाभ नहीं लग रहा। पीएम ने कठिनाई से उबरने में देश की जनता से अपील की है। जनता की ताकत और विश्वास शायद यही मोदी सरकार की इस साल की उपलब्धि है।
सुधीर पंवार ,राष्ट्रीय प्रवक्ता सपा
खामोश ईद के लिए यादगार रहेगा ये साल
केंद्र सरकार का एक साल भारी निराशाजनक, कुप्रबंधन और असीम पीड़ा का साल साबित हुआ। भारतीय अर्थ व्यवस्था पिछले 42 सालों में सबसे बदतर हालत में है। कोरोना का कहर, मजदूरों की त्रासदी ,बेरोजगारी और खामोश ईद के लिए ये यादगार रहेगा ये साल।
अब्दुल राव वारिस, पूर्व विधायक
वादा पूरा नहीं किया सरकार ने
केंद्र सरकार अपने वादों पर खरी नहीं उतरी। आम आदमी परेशान है। कच्चे तेल के दाम अधिक हे। व्यापारी किसान परेशान हैं। आर्थिक हालत बेहद खराब है। सरकार हर मोर्चे पर विफल है।
दीपक सैनी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष
शामली रेलवे स्टेशन ।- फोटो : SHAMLI