दरअसल, शहर के मोहल्ला नौकुआं रोड बर्फ वाली गली निवासी कलीम को एसटीएफ ने 17 अगस्त को गिरफ्तार किया था। एसटीएफ ने कलीम के आईएसआई एजेंट होने का दावा किया था। एसटीएफ ने कलीम के साथ ही उसके भाई तहसीम उर्फ मोटा को भी आईएसआई के संपर्क में होना बताते हुए मामला दर्ज किया था।
बताया गया है कि कलीम के पकड़े जाने से पहले ही तहसीम आईएसआई के संपर्क में था। करीब चार माह का समय बीत चुका है, मगर पुलिस कलीम के संपर्क में रहने वाले पाकिस्तान के लाहौर, रावल पिंडी में रहने वाले आईएसआई एजेंट दिलशाद मिर्जा और अन्य पर शिकंजा नहीं कस सकी है। वहीं आईएसआई एजेंट की गतिविधि जारी है जिसमें पुलिस लोगों को भी सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूक कर रही है कि अनजान लोगों के बहकावे में कतई नहीं आए। ऐसे लोगों की सूचना तुरंत ही पुलिस को दें।
अभी भी चलाया जा रहा व्हाट्सएप नंबर
कलीम को गिरफ्तार करने के बाद जांच में पता चला था कि कलीम के एक नंबर पर व्हाट्सएप पाकिस्तान में बैठा आईएसआई एजेंट दिलशाद मिर्जा या फिर अन्य चला रहा है। जिससे वह कलीम से बात करता था। मगर खुफिया एजेंसी अभी तक आईएसआई एजेंटों तक नहीं पहुंच सकी है, जिसके कारण आशंका प्रबल होती है कि पाकिस्तान में बैठे एजेंट कलीम, तहसीम की तरह अन्य को भी अपने बहकावे में लेकर देश विरोधी पाठ पढ़ा सकते हैं।
दिल्ली से नहीं आई रिपोर्ट, फिर से भेजा जाएगा रिमांडर
एसटीएफ के एएसपी ब्रिजेश कुमार ने बताया कि शामली से पकड़े गए कलीम के दो मोबाइल, उर्दू लिखे पन्नों को जांच के लिए गाजियाबाद फॉरेंसिक लैब भेजा गया था। मगर चार माह बीतने के बाद भी रिपोर्ट नहीं आ सकी है। जिसके कारण जांच ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाई है। फिर से जांच रिपोर्ट जल्दी लेने के लिए लैब के अधिकारियों को रिमांइडर भेजा जाएगा।
फरार चल रहे तहसीम और सहारनपुर के युसुफ को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है। जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। तहसीम के नंबर पर व्हाट्सएप चलने और अन्य मोबाइलों की जांच के लिए फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट मांगी गई है, इसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। - अमरदीप मौर्य, सीओ शामली