बिजनौर के मुंडाखेड़ी गांव के दीपक की हत्या की गई या फिर उसने आत्महत्या की, पुलिस इस गुत्थी में उलझ गई है। मगर इतना जरूर है कि पूरे मामले में बिजनौर पुलिसकर्मियों की लापरवाही की भेंट दीपक चढ़ गया।
आरोपी दरोगा सुनील।
- फोटो : अमर उजाला
अंबाला से लेकर शामली तक दीपक ने एक दो नहीं, बल्कि दस से अधिक बार पुलिस को चेतावनी दी थी कि यदि उसे युवती से अलग करने का प्रयास किया तो वह जान दे देगा, पुलिस ने उसकी चेतावनी को अनदेखा किया। युवती के परिजनों और अन्य ने भी युवक के चेतावनी देने के बयान पुलिस के समक्ष दिए हैं। यदि दीपक फंदे पर खुद लटका तो दरोगा उसका शव खुद ही उतारकर थाने क्यों पहुंच गए। सूचना देकर पुलिस को मौके पर क्यों नहीं बुलाया।
दरोगा सुनील के घर पर जांच करने पहुंचे अधिकारी।
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अब यदि दरोगा सुनील के घर के बजाय कोतवाली में दोनों को ठहराया जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। हालांकि दरोगा सुनील का कहना है कि गाड़ी खराब होने पर ही सहुलियत के लिए प्रेमी युगल, उसके परिजनों और अन्य को अपने पैतृक घर पर ठहराया था। रात के 11 बजने के कारण यह लग रहा था कि कल सुबह सभी बिजनौर के लिए चले जायेंगे। मगर सुबह उठकर देखा तो फंदे पर दीपक लटका हुआ था।
दीपक के घर के बाहर एकत्र लोग।
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महिला सिपाही सुबह ही बिजनौर के लिए हो गई रवाना
दरोगा सुनील के भाई जितेंद्र ने बताया कि तीनों पुलिसकर्मी, प्रेमी युगल और उनके परिजन रविवार की रात करीब 11 बजे घर पहुंचे थे। सुबह जगने पर उन्हें युवक की मौत की जानकारी मिली। एक महिला सिपाही भी थी, जो लड़की के कमरे में सोई थी। बताया जा रहा है कि सुबह होने पर सिपाही को बिजनौर भेज दिया गया। सिपाही को तुरंत ही क्यों बिजनौर भेज दिया गया, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।