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Shamli: उपभोक्ता आयोग का आदेश, डॉक्टर कविता गर्ग पर 10.60 लाख का जुर्माना, अल्ट्रासाउंड में लापरवाही साबित

Fri, 05 Dec 2025 08:00 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली

सार

शामली जिला उपभोक्ता आयोग ने गर्भवती महिला की गलत अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देने और बच्चे के हाथ का पंजा विकसित न होने की जानकारी समय पर न बताने पर डॉ. कविता गर्ग को 10.60 लाख रुपये मुआवजा जमा करने का आदेश दिया है। आयोग ने चिकित्सीय लापरवाही को साबित मानते हुए कठोर टिप्पणी भी की।

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जिला उपभोक्ता फोरम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने गर्भवती महिला के भ्रूण को अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट सही बताने और बाद में बच्ची का हाथ का पंजा न होने के मामले की सुनवाई की। आयोग के अध्यक्ष ने महिला चिकित्सक कविता गर्ग पर 10.60 लाख रुपये जुर्माना अदा करने का आदेश सुनाया है।

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थानाभवन क्षेत्र के गांव हरड़ फतेहपुर निवासी अनुज कुमार ने आयोग में 15 सितंबर 2021 को गेटवेल हॉस्पिटल एवं अल्ट्रासाउंड प्राइवेट लिमिटेड शामली की मैनेजिंग डायरेक्टर, राजपूत अल्ट्रासाउंड सेंटर बागपत, रविंद्र नर्सिंग होम अल्ट्रासाउंड डायग्नोस्टिक शामली और दि ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड शामली के विरुद्ध परिवाद दायर कराया था। 

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परिवादी ने बताया कि उसकी पत्नी शालू गर्भावस्था के दौरान अपने मायके में कुछ दिन रहने के लिए गई थी। इसके विषय में आशा को पता चलने पर उसने उसकी पत्नी को अल्ट्रासाउंड कराने का सुझाव दिया। उसने अपनी पत्नी का राजपूत अल्ट्रासाउंड सेंटर बागपत के यहां नौ अक्तूबर 2019 को अल्ट्रासाउंड कराया, तो बताया कि भ्रूण सही प्रकार से ग्रोथ कर रहा है।

परिवादी ने अल्ट्रासाउंड उसी दिन गेटवेल हॉस्पिटल की डॉ. कविता गर्ग को दिखाया तो उन्होंने रिपोर्ट को सही बताया। 29 जनवरी 2020 को डॉ. कविता गर्ग ने अल्ट्रासाउंड किया और बताया कि भ्रूण पूरी तरह से सही प्रकार से विकास कर रहा है और सभी अंग बिल्कुल ठीक है। एक मार्च 2020 को परिवादी अपनी पत्नी को लेकर फिर डॉ. कविता के यहां गए, लेकिन वहां भीड़ होने और डिलीवरी का समय नजदीक आने के कारण उसने पत्नी का अल्ट्रासाउंड रविंद्र नर्सिंग होम में कराया तो उसने भी रिपोर्ट सही दी।
 
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परिवादी के मुताबिक दो मार्च 2020 को शालू ने पुत्री को जन्म दिया, लेकिन उसके एक हाथ का पंजा नहीं था। उसने डॉ. कविता गर्ग से पूछा कि अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में बच्चा सही होना व अंग विकसित होने बताए गए तो यह तथ्य पहले सामने क्यों नहीं आया कि बच्ची के हाथ का पंजा नहीं है। इतना सुनते ही डॉ. कविता भड़क गई और उसे अपने केबिन से बाहर निकलवा दिया। परिवादी ने अपनी पत्नी को उसके यहां से डिस्चार्ज कराया और चिकित्सा फाइल मांगी तो वह भी नहीं दी गई और आइंदा अस्पताल में आने से मना कर दिया।

आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने जारी आदेश में कहा कि परिवादी डॉ. कविता गर्ग के विरुद्ध परिवाद को सिद्ध करने में सफल रहा। इसलिए उसके विरुद्ध परिवाद स्वीकार किया गया। डॉ. कविता को आदेशित किया गया कि चिकित्सीय लापरवाही व उपेक्षा के कारण परिवादी को हुई मानसिक, शारीरिक क्षतिपूर्ति व बच्चे के हाथ की विकलांगता व प्लास्टिक सर्जरी हेतु साढ़े नौ लाख रुपये व परिवार व्यय दस हजार रुपये परिवादी को अदा करने के लिए इस आयोग में जमा करें। इसके अलावा चिकित्सीय लापरवाही व उपेक्षा के लिए अर्थदंड एक लाख रुपये अधिरोपित किया गया।
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