उनकी बेटी कक्षा तीन में पढ़ती है। जिसकी आठ माह की फीस रुकी हुई है। स्कूल प्रशासन के लगातार फोन आ रहे हैं और वह गन्ने का बकाया होने के कारण फीस तक जमा नहीं कर पा रहे हैं। फीस जमा न होने के कारण स्कूल के शिक्षक पिछले तीन माह से लगातार को दो घंटे उनकी बेटी को लाइब्रेरी में बैठाकर कार्य कराते हैं, जिससे उसकी पढ़ाई पर काफी असर पड़ रहा है।
कई बार उनके पास फोन आया तो उन्हें बकाया भुगतान होते ही फीस जमा करने की बात कहीं, लेकिन उसके बाद भी उसकी बेटी को लगातार परेशान किया जा रहा था। वह रोजाना घर आकर रोती और परिजनों को शिक्षकों द्वारा अलग बैठाने की बात कहती।
बच्चे के रोने से लगातार परेशान होकर परिजनों ने डीएम व एडीएम से शिकायत कर कार्रवाई करने की मांग की। उसके बाद बुधवार को परिजनों ने स्कूल में पहुंचकर हंगामा किया और बच्ची को परेशान न करने की मांग करते हुए सभी बच्चों को साथ में बैठाने की मांग की है, ताकि बच्ची पर किसी भी तरह का गलत प्रभाव न पड़े।
लिखित में नहीं दे रहे परिजन
सरती देवी राजा राम स्कूल के प्रधानाचार्य नितिन राजन टंडन व प्रबंध समिति ने स्कूल में छात्रा के पिता सूरज व किसान नेताओं की बात सुनी और उनसे कहा कि वह लिखित में दे दें कि फीस क्यों जमा नहीं कर पा रहे हैं। उसके बाद उनकी समस्या का समाधान कराया जाएगा। एक प्रार्थना पत्र में लिख दें कि बकाया गन्ना भुगतान होने के बाद छात्रा की फीस पूरी जमा कर दी जाएगी, लेकिन परिजन बिना लिखित में दिए ही वहां से चले गए।
प्रधानाचार्य ने कहा कि उन्होंने छात्रा को अन्य बच्चों से अलग कर लाइब्रेरी में नहीं बैठाया है और न उनकी पढ़ाई बाधित हुई है। छात्रा का पूरा कार्य कराने के बाद ही घर भेजा जाता है। स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और कोई भी अधिकारी आकर यहां जांच कर सकता है कि उन्होंने छात्रा को लाइब्रेरी में बैठाया है या नहीं। इस बारे में एडीएम संतोष कुमार का कहना है कि मामले की जानकारी नहीं है। जानकारी कराई जाएगी।
डीएम के आदेश पर पहुंची पुलिस, जांच की
डीएम रवींद्र सिंह के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने सरती देवी राजा राम स्कूल में पहुंचकर छात्रा शिवांशी से बात की और उसके बाद प्रधानाचार्य व शिक्षकों के ब्यान लेकर सीसीटीवी कैमरे चेक किए। छात्रा ने बताया कि उसको पांच दिन से ही लाइब्रेरी में स्कूल फीस न आने के कारण दो घंटे के लिए बैठाया जाता था और वहीं होमवर्क कराया जाता था। उसके बाद क्लास में भेज दिया जाता था। जहां वह पूरी पढ़ाई करती थी।