14 फरवरी को सिद्धार्थ के पापा प्रदीप कुमार पुलवामा में शहीद हो गए थे। दो मार्च से उसकी बोर्ड की परीक्षाएं थीं। परीक्षा की तैयारी के लिए माहौल और परिस्थितियां एकदम विपरीत थी। मगर, उसे पापा का सीए बनने का सपना पूरा करना था, लिहाजा सिद्धार्थ ने इन हालातों का बखूबी सामना किया। रात को दो बजे तक जागकर पढ़ाई की और नतीजा सामने है। सीबीएसई 12वीं की परीक्षा करीब 85 प्रतिशत अंकों से पास की। सरकारी नौकरी के लिए अब उसकी मार्कशीट का इंतजार है। बकौल सिद्धार्थ नौकरी के साथ वो सीए की भी तैयारी करेगा ताकि पापा का सपना पूरा कर सके।
पुलवामा में 14 फरवरी को आतंकी हमले में शहीद बनत कस्बा निवासी प्रदीप कुमार का परिवार मूलत: गाजियाबाद के प्रताप नगर पुलिस लाइन कालोनी में रहता है। प्रदीप की शहादत के बाद उनकी पत्नी शर्मिष्ठा बड़ा बेटा सिद्धार्थ और छोटा बेटा विजयंत भी बनत आ गए थे। छोटी उम्र में दोनों बेटों के सिर से पिता का साया उठा गया था। ऐसे में दो मार्च से सिद्धार्थ की सीबीएसई 12वीं परीक्षाएं थीं। परीक्षा की तैयारी के लिहाज से हालात बेहद विपरीत थे। अपनी सभी किताबें ओर नोट बुक्स भी गाजियाबाद से नहीं ला सका। मगर, उसने हालातों का मजबूती से सामना किया। बकौल सिद्धार्थ उसने शामली से ही अपनी कुछ बुक्स और मॉडल खरीदे। दिन भर सांत्वना देने वाले आते थे, ऐसे में रात को आठ बजे के बाद वो और उसका भाई दोनों पढ़ते थे। पेपर से तीन-चार दिन पहले ही वो गाजियाबाद गया। एक मार्च से कक्षा नौ में पढ़ने वाले छोटे भाई विजयंत के पेपर शुरू हुए और दो मार्च से उसकी बोर्ड परीक्षाएं। परीक्षा के दिनों में भी 12 -14 घंटे तैयारी की। परिवार में सबने पूरा सपोर्ट किया। परीक्षाफल आया तो उसने 85.4 प्रतिशत अंकों से परीक्षा पास की। सिद्धार्थ को 500 में से 427 नंबर मिले थे। उसने गाजियाबाद के केंद्रीय विद्यालय कमला नेहरू नगर से परीक्षा पास की है। बकौल सिद्धार्थ उसके छोटे भाई विजयंत को भी कक्षा नौ में 77 प्रतिशत अंक मिले हैं।
पापा का सपना जरूर पूरा करूंगा : सिद्धार्थ
सिद्धार्थ के सबसे ज्यादा 95 नंबर एकाउंटेंसी में आए हैं। सिद्धार्थ पापा का सपना था कि वो सीए बने। इसलिए उसने सबसे ज्यादा मेहनत एकाउंटेंसी में ही की। इस पर ज्यादा फोकस किया। वो सीए की तैयारी करना चाहता था, लेकिन पापा की जगह सरकारी नौकरी की बात आई तो परिजनों के कहने पर वो सर्विस तो करेगा लेकिन साथ साथ सीए की भी तैयारी करेगा। रात को इसके लिए टाइम निकालेगा। परिजनों की डीएम शामली से बात हुई थी। उन्होंने मार्कशीट आने के बाद नियुक्ति के लिए आवेदन करने को कहा है। वह चाहते हैं कि उन्हें गाजियाबाद में ही सेल्स टैक्स विभाग या विकास विभाग में सर्विस मिल जाए। सचिवालय में सर्विस की भी इच्छा थी।
सिद्धार्थ को मिले नंबर
अंग्रेजी 87
हिंदी 85
अर्थशास्त्र 81
बिजनेस स्टडीज 79
एकाउंटेंसी 95
सिद्धार्थ के परिजन उनसे मिले थे और उसके इंटर परीक्षा पास करने की जानकारी दी थी। परिजन सचिवालय के अलावा गाजियाबाद में ही सेल्स टैक्स या विकास विभाग में सर्विस की इच्छा जता रहे हैं। नियमानुसार प्रथम नियुक्ति तो शामली जनपद में ही संभव है। कुछ पद और संवर्ग ऐसे हैं जिनके नियुक्ति प्राधिकारी वे हैं, मगर कुछ पद और संवर्ग में नियुक्ति का अधिकार शासन स्तर पर होता है। सिद्धार्थ की मार्कशीट आने के बाद उनके स्तर से जो आवेदन आएगा, उसी आधार पर नियुक्ति संबंधी कार्रवाई शासन से वार्ता के बाद की जाएगी। - अखिलेेश सिंह, जिलाधिकारी।