बीबीपुर गांव में साबुन तैयार करती महिलाएं।संवाद
- फोटो : रामगांव थानाक्षेत्र में अग्निकांड के दौरान जलता मड़हा।
शामली। जिले के स्वयं सहायता समूहों के बनाए उत्पादों को अब ऑनलाइन बाजार उपलब्ध कराने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके लिए समूह प्रमुखों को इसकी बारीकियों की जानकारी दी जाएगी और ऑनलाइन बाजार में अपना वर्चस्व बनाने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के लिए तैयार किया जाएगा।
जिले में विभिन्न समूह से करीब 65 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं साबुन, मिट्टी के बर्तन, टेडी वेयर, जूट के बैग, अचार, झालरें, पापड़, धूपबत्ती आदि उत्पाद तैयार करती हैं। विभाग की ओर से इन उत्पादों को विभिन्न बाजारों, मेलों और प्रदर्शनियों में स्थान दिलाकर उनका प्रचार-प्रसार किया जाता है। इसके अलावा समूह खुद भी अपने उत्पादों की मार्केटिंग करते हैं और उन्हें स्थानीय बाजारों के साथ-साथ अन्य शहरों तक पहुंचाते हैं, लेकिन अभी तक यह दायरा सीमित है। अब समूहों को सीधे ऑनलाइन बाजार से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है।
एनआरएलएम के मैनेजर पंकज कुमार ने बताया कि मीशो, ब्लिंकिट जैसे कई ऑनलाइन वेब प्लेटफॉर्म हैं, जहां ऑनलाइन सामान की बिक्री होती है। इन प्लेटफॉर्म पर स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों का पंजीकरण कराकर उन्हें प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे लोग ऑनलाइन माध्यम से भी इन उत्पादों को खरीद सकेंगे। इससे समूहों की आय में वृद्धि होने की संभावना है।
वेब प्लेटफॉर्म पर स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को जोड़ने की कवायद चल रही है। समूहों को ऑनलाइन बाजार से जोड़ने के लिए उन्हें जानकारी दी जाएगी। जल्द ही इसके लिए गोष्ठी आयोजित की जाएगी।
– प्रेम चंद, उपायुक्त स्वत रोजगार