शामली। धीमानपुरा रेलवे क्रासिंग के पास स्थित किसान हॉस्पिटल पर शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारा। अनियमितता पाए जाने पर हॉस्पिटल को सील कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान अस्पताल संचालक और उसके समर्थकों ने विरोध करते हुए हंगामा काटा। स्वास्थ्य विभाग पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर नारेबाजी की गई।
शुक्रवार को कुछ लोगों ने सीएमओ कार्यालय पहुंचकर शिकायत की थी कि किसान हास्पिटल का संचालन नियम विरुद्ध चल रहा है तथा वहां सीजेरियन डिलीवरी कराई जा रही हैं। इसके बाद ही करीब ढाई बजे प्रभारी नोडल झोलाछाप एवं अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डाक्टर सुशील कुमार के नेतृत्व में टीम ने किसान हॉस्पिटल पर छापा मारा।
इससे अस्पताल कर्मियों में हड़कंप मच गया। टीम को वहां पर कोई मरीज भर्ती नहीं मिला, लेकिन बेड के बराबर में सीजर में प्रयोग किए जाने वाली दवाईयों के रेपर तथा डस्टबिन में ग्लूकोज की खाली बोतलें मिली। इसके अलावा अन्य एलोपैथिक दवाईयां भी मिली।
जिन्हें जब्त कर लिया गया। अस्पताल के रिकार्ड की जांच की, तो जून और जुलाई में कई मरीज की बीएचटी (बेड हेड टिकट) मिली तथा रजिस्टर में मरीजों से रुपयों के लेनदेन का हिसाब मिला। उधर, कार्रवाई के दौरान अस्पताल संचालक डाक्टर योगेश चौधरी भी साथियों के साथ मौके पर पहुंच गए और स्वास्थ्य विभाग की टीम का विरोध शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि जब इसका रजिस्ट्रेशन है तो कार्रवाई के नाम पर उत्पीड़न क्यों किया जा रहा है।
योगेश चौधरी ने रजिस्ट्रेशन भी दिखाया, लेकिन टीम में शामिल अधिकारियों ने उनकी कोई नहीं सुनी। इसके बाद में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने
अनियमितता पाए जाने पर अस्पताल को सील कर दिया। वहीं, जब टीम लौटने लगी, तो भीड़ ने उनकी कार रोक ली और हंगामा किया। कोतवाली पुलिस ने
भीड़ को वहां से हटा दिया।
कुछ दिन पूर्व ही बंद कर दिया था अस्पताल ः शामली। किसान हॉस्पिटल का संचालन पूर्व में रजिस्ट्रेशन के आधार पर ही किया जा रहा था। कुछ दिन पूर्व ही इसके संचालक योगेश चौधरी ने सीएमओ कार्यालय को पत्र भेजकर अस्पताल बंद करने और आयुर्वेद क्लीनिक के तौर पर संचालित करने के लिए नए सिरे से रजिस्ट्रेशन को आवेदन किया था। उस पर अभी तक सीएमओ कार्यालय से कोई निर्णय नहीं हो पाया था।
अस्पताल में लगे थे डाक्टरों के बोर्ड ः शामली। किसान हॉस्पिटल के बाहर लगे बोर्ड लगे मिले, जिन पर कई डाक्टरों तथा सर्जन का नाम लिखा हुआ
मिला। साथ ही बोर्ड पर पथरी सहित अन्य आपरेशन होना भी लिखा गया है।
सीएमओ ऑफिस पर पहुंचकर जताई नाराजगी
शामली। शुक्रवार को किसान हॉस्पिटल पर हुई कार्रवाई के बाद हड़कंप मच गया। सील लगने के बाद हॉस्पिटल संचालक ने अपने साथियों के साथ सीएमओ कार्यालय पहुंचकर रोष जताया। लोगों की भीड़ इकट्ठा होने पर सूचना दिए जाने के बाद शामली कोतवाली पुलिस पहुंच गई और लोगों को समझाया।
साजिश के तहत किया जा रहा उत्पीड़न
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुझे बेवजह परेशान कर रहा है। आयुर्वेदिक क्लीनिक के रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया गया है। अस्पताल का संचालन नहीं हो रहा और ऑपरेशन भी नहीं हो रहे हैं। किसी साजिश के तहत उनका उत्पीड़न किया जा रहा है।
- डाक्टर योगेश चौधरी, संचालक किसान हॉस्पिटल।
अब तक कहां सोया था स्वास्थ्य विभाग
शामली। जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने बगैर रजिस्ट्रेशन चल रहे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सख्त हिदायत दी, तो स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया। इसी का असर है कि तीन दिन पूर्व ही मुजफ्फरनगर मार्ग स्थित आर्यन हॉस्पिटल पर छापा लगा और अनियमितता पाए जाने पर अस्पताल सील कर दिया गया। हालांकि उसके खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की ओर से कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।
अब शुक्रवार को किसान हॉस्पिटल पर सील लगा दी गई। इन अस्पतालों का संचालन एक या दो दिन में शुरू नहीं हुआ, बल्कि काफी समय से यह चल रहे थे। ऐसे में सवाल उठता है कि स्वास्थ्य विभाग आखिर अब तक चुप क्यों था। नियमों का पालन करने में उनके हाथ किसी ने बांध रखे थे या फिर जानबूझकर गलतियों पर पर्दा डाला जा रहा था।
ऐसे कई सवाल हैं, जो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी कटघरे में खड़ा करते हैं। क्योंकि अवैध क्लीनिक, लैब और अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए विभाग में अलग से एक अधिकारी की नियुक्ति है। सीएमओ से लेकर एसीएमओ और अन्य अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि नियमों का पालन कराएं।
मगर, किसी अधिकारी ने अपनी जिम्मेदारी का ठीक से निर्वहन नहीं किया। यदि गंभीरता से जांच कराई जाएं, तो स्वास्थ्य विभाग के मठाधीशों की गर्दन भी फंस सकती है, जो व्यवस्था को पलीता लगाते हैं।