- परिषदीय स्कूल के बच्चों को यूनिफार्म की धनराशि नहीं मिल सकी
- अधिकांश अभिभावकों के बैंक खाता और आधार नंबर का मेल न होने से आ रही दिक्कत
- जनपद के 496 स्कूल में 73 हजार छात्र-छात्राओं का है नामांकन, अभी करना होगा इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। नया शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से शुरू हो चुका है। उसके बाद गर्मी की छुट्टी भी हो चुकी हैं और चार दिन बाद पुनः विद्यालय खुलने वाले हैं। लेकिन स्कूल खुलने पर बच्चों को बिना यूनिफार्म के ही स्कूल आना पड़ेगा। क्योंकि अभी तक आधार फीडिंग न होने के कारण उनके खाते में धनराशि नहीं भेजी गई है। दो माह बीत चुके हैं और अब तीसरा माह भी बीतने वाला है। जांच में बीस प्रतिशत बच्चों के अभिभावकों के खाते व आधार नंबर का मिलान भी नहीं होना भी इसका कारण है।
बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए मिड-डे मील की व्यवस्था भी की गई है। पिछले दो साल से विद्यार्थियों के जूता, मोजा, बैग और स्वेटर खरीद के लिए 1200 रुपये सीधे अभिभावकों के बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक जिले में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्तर के करीब 596 विद्यालय संचालित हो रहे हैं। जिसमें करीब 73 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें आधार पंजीकरण, आधार सत्यापन, बैंक सीडिंग जैसी प्रक्रिया के कारण कई अभिभावकों के खाते में धनराशि नहीं पहुंची है।
शिक्षकों को जांच करके धनराशि भिजवाने की जिम्मेदारी दी गई है। जिसमें वे लगे हैं, लेकिन बैंक खाता और आधार नंबर का मिलान न होने के कारण अभिभावकों के बैंक खाते में धनराशि नहीं पहुंच पा रही है, जबकि नए सत्र में बेसिक शिक्षा परिषद ने दो महीने में अभिभावकों के बैंक खाते में डीबीटी के तहत 1200 रुपये भेजने के निर्देश दिया है। लेकिन अब तक धनराशि नहीं आई है। ऐसे में अभिभावक परेशान हैं। उनका कहना है कि इस योजना के चलाने से लाभ के बजाय नुकसान ही हो रहा है। विद्यालय पर एक साथ ड्रेस, जूता मोजा, स्वेटर आदि मिल जाता था। इससे समस्या हो गई है।
इस संबंध में जिला समन्वयक अमित कुमार ने बताया कि अभिभावकों के बैंक खाते में धनराशि जल्द भिजवा दी जाएगी, क्योंकि लखनऊ से अभी हरी झंडी नहीं मिली है। जुलाई में उनके खाते में धनराशि आ जाएगी।