शामली। बारिश का मौसम शुरू होते ही जनपद के कई परिषदीय विद्यालयों की जर्जर इमारतों में छतें टपकने लगी हैं। दीवारे गिरने की स्थिति में है। इन सबके बीच बच्चे इसी इमारत में बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं। अभिभावकों और ग्रामीणों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। वहीं विभागीय स्तर पर स्थायी समाधान नहीं होने से शिक्षक भी जोखिम उठाकर पढ़ाई कराने के लिए विवश हैं। पड़ताल में शुक्रवार को कई विद्यालयों की स्थिति चिंताजनक मिली।
सिंभालका में जर्जर कमरों से हटाए बच्चे
कंपोजिट विद्यालय सिंभालका के प्राथमिक भवन में छोटे बच्चों के दो कमरे बेहद जर्जर मिले। इन कमरों की छतों से बारिश का पानी टपक रहा था। शिक्षकों ने सुरक्षा के मद्देनजर बच्चों को दूसरे कमरों में बैठाकर पढ़ाई शुरू कर दी है।
बलवा में तीन कमरे बंद, चार में चल रहा पूरा स्कूल
कन्या जूनियर हाईस्कूल बलवा की इमारत भी बदहाल मिली। विद्यालय में 150 से अधिक छात्र पंजीकृत हैं। सात कमरों में से तीन कमरों को अत्यधिक जर्जर होने के कारण बंद कर दिया गया है। शेष चार कमरों में कक्षाओं के साथ अन्य सभी गतिविधियां संचालित हो रही हैं। प्रधानाध्यापक बिजेंद्र सिंह ने बताया कि कई बार विभाग को लिखित सूचना दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। उ
काबड़ौत में टूट रहा बरामदा, टपक रही छत
कंपोजिट विद्यालय काबड़ौत में बरामदे के लिंटर का बाहरी हिस्सा टूट रहा है, कमरों की छतों से पानी टपक रहा है और खिड़कियां भी क्षतिग्रस्त हैं। बच्चे जर्जर भवन के आसपास खेलते नजर आए। प्रभारी प्रधानाध्यापक अमित ने बताया कि भवन को काफी पहले जर्जर घोषित करने के लिए विभाग को प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई। मजबूरी में इसी भवन में शिक्षण कार्य कराया जा रहा है।
कुछ जर्जर विद्यालयों की सूची आई है। जांच समिति गठित की जा रही है। समिति के द्वारा जांच करने के बाद जर्जर स्कूल भवनों को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू होगी और स्कूल के बच्चों की दूसरे भवन में शिक्षण कार्य की व्यवस्था की जाएगी। - संतोष कुमार, बीएसए।
जूनियर हाईस्कूल बलवा में जर्जर स्कूल भवन का लिंटर। संवाद