शामली। मदरसों में दीनी तालीम के साथ दुनियावी तालीम भी बच्चों को दी जा रही है, लेकिन पाठ्यक्रम को लेकर स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। हर मदरसे में अलग प्रकाशक की किताबें पढ़ाई जा रही हैं। प्राइवेट स्कूलों की तरह ही अलग-अलग मदरसे में अलग किताबें पढ़ाई जा रही हैं। अधिकांश मदरसों में वरीयता के आधार पर अरबी कोर्स चल रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मदरसों के पाठ्यक्रम में बदलाव का संकेत दिया है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की मीटिंग के दौरान उन्होंने कहा कि हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, इतिहास तथा भूगोल के साथ ही तकनीकी विकास के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। अमर उजाला टीम ने बृहस्पतिवार को जनपद के मदरसों में शिक्षा प्रणाली को लेकर पड़ताल की, जिसमें कई अहम तथ्य सामने आए। मदरसों में दीनी तालीम के लिए किताबों की कोई कमी नहीं है, लेकिन सरकारी स्कूलों की तरह यहां पर किसी तरह का पाठ्यक्रम निर्धारित नहीं है।
शामली में दिल्ली रोड स्थित मदरसा रशीदिया इमदादिया जूनियर हाईस्कूल के मुफ्ती जाकिर ने बताया कि बच्चों को अंग्रेजी, हिंदी, विज्ञान, गणित और इतिहास की किताबें भी पढ़ाई जा रही हैं। वहीं, इस मदरसे में पढ़ने वाले छात्रों का कहना था कि अरबी कोर्स के अलावा एक या दो घंटा गणित, अंग्रेजी, विज्ञान और हिंदी की पढ़ाई चलती है। इस मदरसे के प्रबंधक हाजी कुतुबुद्दीन ने कहा कि दुनियावी तालीम के लिए पाठ्यक्रम उपलब्ध होना जरूरी है। सरकारी स्तर पर पाठ्यक्रम नहीं मिलने के कारण ही निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाई जा रही हैं।
वहीं, कस्बा कांधला के ईदगाह स्थित मदरसा इस्लामिया सुलेमानिया में छात्रों को दीनी और दुनियावी तालीम दी जा रही है। वहां पढ़ाई करा रहे मौलाना ने बताया कि मदरसे में करीब 220 तलबा हैं। मदरसे में इतिहास , भूगोल, अंग्रेजी, गणित की शिक्षा भी दी जाती है, लेकिन सभी किताबें अरबी भाषा में हैं। वहीं, मदरसा जामिया अरबिया कासिमुल उलूम के प्रबंधक मौलाना सैययद बदरूल हुदा ने बताया कि मदरसे में करीब 350 तलबा हैं, जो सभी विषयों पर पढ़ाई करते हैं। दीनी तालीम के साथ दुनियावी तालीम भी दिलाई जा रही है।
जिले में संचालित हैं 46 मदरसे --
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रसून राय ने कहा कि जिले में 46 मदरसे रजिस्टर्ड हैं। सभी मदरसों में दीनी तालीम के अलावा विज्ञान, अंग्रेजी, हिंदी, गणित, इतिहास और भूगोल की शिक्षा भी दिलाई जा रही है। समय समय पर मदरसों में चेकिंग भी कराई जाती है।
सुधार की जरूरत भी है ---
मदरसों में पाठ्यक्रम के बदलाव की ओर प्रदेश सरकार कदम बढ़ा रही है, मगर मदरसों में पढ़ने वालों को सहूलियत की तरफ भी ध्यान देना जरूरी है। मदरसा संचालक कमेटी के पदाधिकारी ने बताया कि मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को समय पर वजीफा नहीं मिलता, कई बार प्रदर्शन तक करने पड़े। वहीं, जब सरकारी स्कूलों में निर्धारित पाठ्यक्रम की किताबें नहीं पहुंच पा रही हैं, तो मदरसों में किताबें कैसे पहुंचेंगी, यह सवाल भी उठता है।
मदरसों में पढ़ाई जा रही यह किताबें --
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, गणित मंथन, सामाजिक विज्ञान, भाषा की बात, ग्रीन रीवोल्यूशन, इंगलिश रीडर, सामाजिक उमंग एवं पर्यावरण। सामाजिक विज्ञान की किताबों में 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हुई लड़ाई का उल्लेख है। अरबी कोर्स में बच्चों को इतिहास के बारे में तारीख ए फरिश्ता, उलेमा हिंद, तारीख ए इस्लाम, साहबा की तारीख, मोहद्दीस की तारीख आदि पढ़ाई जा रही हैं।