शामली। जिले में स्क्रब टाइफस का खतरा बढ़ रहा है। इस महीने दो मरीजों में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई है। दोनों मरीजों की जांच मेरठ स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल अस्पताल में कराई गई थी। दो मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक नौ सितंबर को शामली के सरवरपीर निवासी 50 वर्षीय व्यक्ति को बुखार होने पर परिजनों ने मेरठ में सरदार वल्लभभाई पटेल में जांच कराई, जिसमें स्क्रब टाइफस का पता चला। 19 सितंबर को गांव महावतपुर निवासी 19 वर्षीय युवक की मेरठ के अस्पताल में जांच कराई गई, जिसमें स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई। दोनों मरीजों की हालत उपचार के बाद ठीक बताई गई है। जिला मलेरिया अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि स्क्रब टाइफस के दो मरीज सामने आए हैं। उन्होंने लोगों से खेतों, झाड़ियों और घास वाले स्थानों पर जाते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
क्या है स्क्रब टाइफस
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज अखौरी ने बताया कि स्क्रब टाइफस ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। यह संक्रमित चिगर यानी माइट के लार्वा के काटने से फैलता है। खेतों, झाड़ियों और घास वाले क्षेत्रों में काम करने या अधिक समय बिताने वाले लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है।
ये हैं प्रमुख लक्षण
अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, अत्यधिक कमजोरी और कई मामलों में त्वचा पर लाल चकत्ते होना। माइट के काटने वाली जगह पर काले रंग का असामान्य घाव या पपड़ी भी बन सकती है। समय पर उपचार न मिलने पर संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है और शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। समय पर उपचार मिलने से यह ठीक हो जाता है।
ऐसे करें बचाव
खेतों, झाड़ियों और घनी घास वाले स्थानों पर जाते समय पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। खुले शरीर पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार कीट विकर्षक का इस्तेमाल किया जा सकता है। घर के आसपास झाड़ियों और घास-फूस की नियमित सफाई रखें। लक्षण नजर आने पर चिकित्सक की सलाह से जांच और उपचार कराएं।