थानाभवन दयाल आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत में कथा करते मनोज महाराज । संवाद
थानाभवन। दयाल आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथा व्यास मनोज महाराज ने कहा कि अपनापन परवाह और थोड़ा सा वक्त ,ये वो दौलत है जो आपके अपने आपसे चाहते हैं । अपनेपन के बिना रिश्तों का अहसास नही हो सकता है ।
कहा कि अपनापन किसी भी संबंध के लिए एक प्राणवायु के समान ही होता है। अपनेपन से अपने तो अपने,पराये भी अपने बन जाते हैं। सारी सृष्टी परमात्मा का परिवार है। हमे सभी के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। भगवान तो तुलसीजल से भी संतुष्ट हो जाते हैं। सत्कर्म सदैव हमारी रक्षा करते हैं। अंहकार ही भक्तिमार्ग में सबसे बड़ी बाधा है। श्रीकृष्ण सुदामा की मित्रता भगवान श्रीकृष्ण के मित्रधर्म को निभाने का सबसे सुंदर उदाहरण है।
कहा कि भगवान की भक्ति करने से मन शांत रहता है। सत्कर्म करने से यश बढता है। सेवा करने से आशीर्वाद मिलते हैं। गौमाता और परमात्मा में कोई अन्तर नहीं है। गौसेवा परमधर्म है। इस अवसर पर ललित अरोरा ,निक्का चावला, श्यामनारंग, सुभाष नारंग,सरिता गर्ग,राकेश गोयल माैजूद रहे।
थानाभवन दयाल आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत में कथा करते मनोज महाराज । संवाद