शामली। मनोचिकित्सक के त्यागपत्र ने जिला अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद बुधवार की देर रात पड़ताल के दौरान सामने आया कि जिला अस्पताल में रात को सुरक्षा रामभरोसे हैं। अस्पताल में कोई भी कहीं पर घूमता रहे, उसे रोकने टोकने वाला कोई नहीं है। कोलकाता में महिला चिकित्सक के साथ हुई घटना के बाद शासन के प्रमुख सचिव की तरफ से जारी दिशा निर्देशों का कोई पालन नहीं किया गया। अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों के लिए न तो प्रवेश पत्र बनाए जा रहे हैं और न ही कंट्रोल रूम की व्यवस्था की गई।
रात 12 बजे पड़ताल के दौरान जिला अस्पताल के मुख्य गेट पर दो पीआरडी के जवान मिले, जिनमें एक सो रहा था। वहां तैनात पीआरडी के जवान ने बताया कि उन्हें किसी को रोकने की इजाजत नहीं है। अस्पताल के अंदर कहीं पर भी सुरक्षा गार्ड नहीं मिला। वहां पर मौजूद किसी भी तीमारदार का प्रवेश पत्र नहीं बनाया गया था। अस्पताल के बाहर घुप अंधेरा था। मगर बार-बार मांग के बावजूद लाइटें नहीं लगवाई जा रही है।
जिला अस्पताल में अभी तक न तो कंट्रोल रूम चालू मिला और न ही रात में कोई सुरक्षा अधिकारी निरीक्षण करने पहुंचे। जिला अस्पताल के पीछे की तरफ चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों की आवासीय काॅलोनी है, इसके बाद भी वहां पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं है।
मनोचिकित्सक के इस्तीफे के बाद विभाग में मची खलबली
जिला अस्पताल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत एक साल से नियुक्त मनोचिकित्सक डॉ. उर्वशी ने बुधवार को इस्तीफे का नोटिस दे दिया। मनोचिकित्सक ने पारिवारिक समस्याओं की वजह से इस्तीफा देने की बात कही है। हालांकि इसके पीछे मरीजों से अभद्रता करने व सुरक्षा व्यवस्था के पर्याप्त इंतजाम न होना बताया गया है। इससे पहले दो सितंबर को इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. आंचल भी इस्तीफा दे चुकी है।
रात में निरीक्षण करना तक मुनासिब नहीं समझ रहे अधिकारी
प्रमुख सचिव ने सीएमओ को पत्र भेजकर रात में सुरक्षा की दृष्टि से जिला अस्पताल का निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए थे। अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि पिछले करीब तीन माह से रात में किसी भी अधिकारी ने निरीक्षण नहीं किया है। इसके अलावा घर जाने वाली महिला कर्मचारी की सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नहीं है।
ये बोले तीमारदार
कैराना निवासी मुस्तकीम ने बताया उसका भाई दुर्घटना में घायल होने पर इलाज के लिए यहां भर्ती है। रात में यहां पर न तो कोई गार्ड है और न ही रात में कोई मरीज को देखने आता। सुरक्षा के लिए यहां कोई व्यवस्था नजर नहीं है।
कांधला क्षेत्र निवासी इरफान ने बताया रात में सुरक्षा की यहां पर कोई व्यवस्था नहीं है। उनके पास कोई प्रवेश पत्र नहीं है और न ही किसी ने बनाया। यहां पर कोई सुरक्षा गार्ड भी नहीं है।
जिला अस्पताल में सुरक्षा के लिए दिन और रात में 13 सुरक्षा गार्ड नियुक्त है। अब जो नए सुरक्षाकर्मी नियुक्त होंगे, उनमें पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता दी जाएगी। शासन के अस्पतालों में सुरक्षा संबंधी दिशा निर्देशों का पूरी तरह पालन कराया जाएगा।
-डॉ. अनिल कुमार, सीएमओ