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राहुल और प्रियंका ने शहीदों के परिवार के साथ दुख और दर्द किया साझा

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file - फोटो : amarujala
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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा ने पुलवामा में शहीद हुए प्रदीप और अमित के परिवार के सदस्यों को ढांढस बंधाया। राहुल और प्रियंका ने पीड़ितों के परिजनों के साथ बैठकर उनका दुख और दर्द बांटा। राहुल ने बंद कमरे में शहीद प्रदीप के बडे़ बेटे सिद्धार्थ से आठ मिनट बातचीत की। उससे पूछा कि सीआरपीएफ की नौकरी के बारे में तुम्हारी राय क्या है। उसके पापा इस बारे में क्या कहते थे। उधर, प्रियंका ने भी वहां ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिस कांस्टेबल से यूपी पुलिस की नौकरी के बारे में जानकारी ली।
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बुधवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी करीब 2.38 बजे शामली पहुंचे। पहले वे सीधे पंजाबी कालोनी में शहीद अमित की तेरहवीं की शोकसभा में शिरकत की। शोक सभा में राहुल गांधी ने अमित के पिता सोहनपाल भाई प्रमोद, अर्जुन को गले लगाया। शहीद अमित के पिता से राहुल ने कहा कि कोई परेशानी हो तो उन्हें बताना। वह हर वक्त आपके परिवार के लिए तैयार हैं। इसके बाद बनत की चौपाल पर शहीद प्रदीप के चित्र पर राहुल और प्रियंका ने पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। राहुल ने प्रदीप के पिता जगदीश प्रसाद को गले लगाकर ढांढस बंधाया। कहा कि आपके बेटे ने हिंदुस्तान के लिए प्राण न्योछावर किए हैं, आपके परिवार पर तो पूरे देश को गर्व है। उन्होंने भरोसा दिया कि वे हमेशा परिवार के साथ हैं। इसके बाद राहुल और प्रियंका सीधे प्रदीप के घर ऊपर की मंजिल पर गए। प्रियंका ने यहां मौजूद प्रदीप की मां सुलेंता और बहन को सांत्वना दी। अपने कंधे पर उनका सिर रखकर कहा कि आप तो शहीद बेटे की मां हैं। आप पर तो हमें नाज है। प्रियंका ने शहीद के छोटे बेटे विजयंत से बातचीत की। 

सिद्धार्थ से बंद कमरे में की बात 
इसके बाद राहुल गांधी जीने से नीचे आए और शहीद के बड़े बेटे सिद्धार्थ को एक कमरे में ले जाकर उससे अलग में करीब आठ मिनट तक बातचीत की। बाद में सिद्धार्थ ने बताया कि राहुल गांधी ने सीआरपीएफ की नौकरी के बारे में पूछा था। उन्होंने पूछा था कि आपके पापा अपनी नौकरी के बारे में क्या बताते थे। राहुल गांधी ने कहा कि वे उनके दर्द में हमेशा साथ रहेंगे। उन्हें अपना पर्सनल मोबाइल नंबर दिया और कहा कि कभी भी कोई दिक्कत हो तो वो सीधे उनसे बात करें। वह उनकी हर मदद करेंगे। साथ ही जॉब आदि में भी मदद करने का भरोसा दिया है।  
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सिद्धार्थ  ने बताई मन की पीड़ा
शामली। शहीद प्रदीप के बेटे सिद्धार्थ ने राहुल गांधी को अपने मन की पीड़ा बताई। सिद्धार्थ ने राहुल गांधी को बताया कि 16 साल की नौकरी में पापा को कभी सामान्य स्थान पर पोस्टिंग नहीं मिली। हमेशा खतरनाक जगह पर ही वे तैनात रहे। पापा कहते थे कि सीआरपीएफ की नौकरी कोई आसान नहीं हैं। हम कोई निर्णय नहीं ले सकते। हमेशा जान हथेली पर ही रहती है। कभी कोई गोली मारकर चला जाए क्या पता। आर्मी में तो सुविधाएं हैं। हालांकि सीआरपीएफ आर्मी से ज्यादा काम करती है। सिद्धार्थ ने राहुल गांधी को पोस्टिंग सिस्टम के संबंध में बातचीत की। सिद्धार्थ का दर्द था कि सिफारिश या पहुंच वाले पीस एरिया में कई कई साल रह जाते हैं, जबकि कुछ डेंजर एरिया में ही पोस्ट रहते हैं। इस तरह से सिस्टम से उसने नाराजगी जाहिर की। 

एक घंटे में ही लोगों से घुल मिल गए राहुल -प्रियंका
शमाली। पंजाबी कॉलोनी के रघुनाथ मंदिर में जब राहुल और प्रियंका पहुंचे, तो वहां शोक सभा में  एक ओर पुरुष बैठे थे, जबकि दूसरी ओर महिलाएं। शोक सभा में पहुंचते ही राहुल गांधी हाथ जोड़कर आगे बढ़े। राहुल पुरुषों के बीच जाकर बैठ गए और प्रियंका महिलाओं की तरफ। राहुल ने शहीद अमित के पिता को गले से लगाया। उसके भाइयों से भी एक एक कर गले मिले। उधर, प्रियंका गांधी ने भी शहीद अमित की मां को गले से लगाया तो वह बिलख उठी। ये देख प्रियंका भी भावुक हो गईं। उनकी आंखों से भी आंसू छलक आए। दो तीन महिलाएं फफक पड़ीं, तो प्रियंका ने उनको भी सांत्वना दी। कहां पूरा देश आपके साथ है। दोनों भाई बहन शोकसभा में आम लोगों की तरह उनके बीच बैठे और बात की। एकदम सादगी भरे अंदाज में उन्होंने हर किसी से बात की। ठीक इसी तरह उन्होंने बनत कस्बे में आम लोगों के बीच बैठकर परिवार का दुख दर्द बांटा। परिवार की महिलाओं को प्रियंका ने गले लगाकर बात की। दोनों भाई बहनों की ये सादगी देख लोग भी उनकी प्रशंसा कर रहे थे।  
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