शामली। रात में पड़ने वाले पाले से गन्ने से लेकर गेहूं, टमाटर, मिर्च, बैंगन आदि फसलों को अधिक नुकसान हो सकता है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को पाले से बचाव के टिप्स दे रहे हैं। फसलों के आसपास धुआं करने से भी कुछ हद तक पाले से फसलों का बचाव किया जा सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि जिस रात पाला पड़ने की संभावना हो उस रात 12:00 से 2:00 बजे के आस-पास खेत की उत्तरी पश्चिमी दिशा से आने वाली ठंडी हवा की दिशा में खेतों के किनारे पर बोई हुई फसल के आसपास, मेड़ों पर घास-फूस जलाकर धुआं करना चाहिए, ताकि खेत में धुआं हो जाए एवं वातावरण में गर्मी आ जाए। इससे पाले के नुकसान से बचा जा सकता है।
बताया कि टमाटर, मिर्च, बैंगन आदि सब्जियों, पपीता एवं केले के पौधों एवं मटर, चना, अलसी, सरसों, जीरा, धनियां, सौंफ आदि में 50 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान हो सकता है। पाले के प्रभाव से पौधों की पत्तियां एवं फूल झुलसे हुए दिखाई देते है, यहां तक कि अधपके फल सिकुड़ जाते हैं। फलियों एवं बालियों में दाने नहीं बनते हैं एवं बन रहे दाने सिकुड़ जाते हैं। दोपहर बाद अचानक हवा चलना बंद हो जाए तथा आसमान साफ रहे हैं या उस दिन आधी रात के बाद से ही हवा रुक जाए तो पाला पड़ने की संभावना अधिक रहती है। रात को विशेष कर तीसरे एवं चौथे पहर में पाला पड़ने की संभावनाएं रहती हैं।
बिन खर्च के पाले से कैसे करें बचाव
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार फसलों को पाले से बचाने के कई तरीके हैं। इनमें कुछ तो देशी जुगाड़ है और साथ ही दवाइयों की सहायता भी ली जाती है। धुएं से वातावरण को गर्म करें या फिर सिंचाई करें। इन दोनों जुगाड़ के अलावा खेत में रस्सी से फसलों को हिलाते रहें, जिससे फसल पर पड़ी हुई ओस गिर जाती है और फसल पाले से बच जाती है।
फसलों के बचाव के लिए दवाइयों का उपयोग
यूरिया की 20 Gr/Ltr पानी की दर से घोल बनाकर फसलों पर छिड़काव करना चाहिए । इसके आलावा घुलनशील सल्फर 80% डब्लू डी जी की 40 ग्राम मात्रा प्रति 15 लीटर ..पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है। ऐसा करने से पौधों की कोशिकाओं में उपस्थित जीवद्रव्य का तापमान बढ़ जाता है।