संवाद न्यूज एजेंसी
कैराना। जिलाधिकारी ने पालिका के डंपिंग ग्राउंड का निरीक्षण कर प्रोसेसिंग प्लांट की गुणवत्ता परखी। वहीं उन्होंने प्रोसेसिंग प्लांट में जल्द ही मशीनें लगवाने के लिए एस्टीमेट बनाने के निर्देश दिए।
कैराना नगर पालिका परिषद की ओर से करीब 2 साल पहले कूड़ा निस्तारण एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु 14 वें वित्त आयोग के तहत नगर से बाहर गंदराऊ रोड पर करीब 25 बीघा भूमि खरीदी गई थी। जहां पर डंपिंग ग्राउंड में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु कार्य योजना बनाई गई थी। उस समय डंपिंग ग्राउंड के लिए करीब तीन करोड़ रुपये का बजट भी पास कर दिया गया था। कूड़ा निस्तारण के लिए प्रोसेसिंग प्लांट बनाए जाने का का कार्य (सीएनडीएस) कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी सहारनपुर को सौंपा गया था। तभी से प्रोसेसिंग प्लांट बनाए जाने का कार्य किया जा रहा।
करीब एक माह पूर्व प्रोसेसिंग प्लांट बनकर तैयार हो गया था। सोमवार को जिलाधिकारी रवींद्र सिंह ने डंपिंग ग्राउंड पर पहुंचकर प्रोसेसिंग प्लांट की गुणवत्ता परखी तथा कूड़ा निस्तारण के कार्य के बारे में जानकारी जुटाई। कार्यदाई संस्था महालक्ष्मी कंपनी के ठेकेदार संदीप कुमार द्वारा जिलाधिकारी को बताया गया कि प्रोसेसिंग प्लांट करीब तीन करोड रुपये की लागत से तैयार हुआ है। जिसमें प्रतिदिन 50 टन कूड़े का निस्तारण किया जा सकता है। इस दौरान जिलाधिकारी ने सुरक्षा गार्ड रूम व प्रोसेसिंग प्लांट के बारे में जानकारी जुटाई। इस मौके पर एसडीएम स्वप्निल यादव, पालिका जेई सूरज शर्मा, लिपिक रविंद्र कुमार व विपुल कुमार आदि मौजूद रहे।
प्रोसेसिंग प्लांट में अभी मशीनों की दरकार
प्रोसेसिंग प्लांट का निरीक्षण करने पहुंचे जिलाधिकारी को बताया गया हैं कि प्रोसेसिंग प्लांट बनकर तैयार हो चुका है। जिसमें कूड़ा निस्तारण एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु मशीन मंगाई जाएंगी। प्रोसेसिंग प्लांट को कार्यदाई संस्था द्वारा पालिका अधिशासी अधिकारी को हैंडओवर किया जाएगा। जिलाधिकारी ने पालिका जेई को मशीनें मंगवाने के लिए जल्द से जल्द एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजने के निर्देश दिए। प्रयास रहेगा कि जल्द ही प्लांट को शुरू कराया जाए।
कूड़े से तैयार होगा खाद व बायोडीजल
डंपिंग ग्राउंड में नगर का समस्त कूड़ा पहुंचाया जाएंगा। जहां पर गिले व सूखे कूड़े को मशीनों के द्वारा अलग किया जाएगा। इसके बाद कूड़े के बचे अपशिष्ट से खाद व बायोडीजल बनाया जाएगा। खाद व बायोडीजल को संबंधित फैक्ट्रियों को बेचा जाएगा। इससे पालिका की आय भी बढ़ेगी।