शामली। जिले में एड्स रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस साल में अब तक 86 रोगी सामने आ चुके हैं। इनमें अधिकतर ट्रक चालक और श्रमिक हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सकारात्मक सोच और जागरुकता ही एड्स से बचाव है।
हर साल एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य हर वर्ग के लोगों को एड्स से बचाव के लिए जागरूक करना है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से समय-समय पर एड्स से बचाव के लिए जागरुकता कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं, इसके बाद भी जिले में एड्स रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सीएचसी शामली और जिला अस्पताल में एकीकृत परामर्श एवं प्रशिक्षण केंद्र पर मरीजों की काउंसिलिंग कर एड्स से बचाव की जानकारी दी जाती है।
सीएचसी की काउंसलर दीपा चौहान ने बताया कि इस साल में अब तक करीब 55 एड्स रोगी सामने आ चुके हैं। इनमें करीब सात महिलाएं हैं। पिछले साल 2022 में करीब 8100 जांच हुई थी, जिनमें 86 एड्स रोगी पाए गए थे। 2021 में करीब 75 एड्स रोगी मिले थे। उधर, जिला अस्पताल में काउंसलर अंशु तोमर ने बताया कि हर महीने छह से सात एड्स रोगी सामने आ रहे हैं। अप्रैल से अब तक पांच हजार लोगों की जांच हुई, जिनमे 34 एड्स रोगी मिले। इनमें 14 महिलाएं हैं। पिछले साल अगस्त 2022 से नवंबर 2023 तक 62 एड्स रोगी मिल चुके हैं। उन्होंने बताया कि अधिकतर रोगी ट्रक चालक व श्रमिक है। इसकी वजह असुरक्षित यौन संंबंध बनाने, नशे के इंजेक्शन लगाने में एक ही सिरिंज का इस्तेमाल कई लोगाें का करना आदि होता है। यह रोग छूने या साथ उठने बैठने से नहीं फैलता।
सीएचसी में लिंक एआरटी से मिलती है दवा
एड्स की पुष्टि होने पर रोगी को शुरूआत में दवा एआरटी सेंटर मुजफ्फरनगर से मिलती है। वहां की दवा चलने के छह माह बाद जब हालत सामान्य होती है तो सीएचसी शामली में बनाए गए लिंक एआरटी सेंटर से मरीजों को दवा दी जाती है। काउंसलर अंशु तोमर का कहना है कि एड्स रोगियों को दवा उनकी इम्यूनिटी पावर बढ़ाने के लिए दी जाती है। नियमित रूप से दवा लेने और पौष्टिक आहार लेने से मरीज लंबे समय तक अपना जीवन सामान्य तरीके से गुजार सकता है। इसलिए मरीजों को नियमित रूप से उपचार कराना चाहिए। साथ ही अगर किसी व्यक्ति में इस रोग के लक्षण दिखाई देते हैं तो अस्पताल में जांच और उपचार कराना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में जांच व उपचार की निशुल्क सुविधा उपलब्ध है।
गर्भवती महिला नियमित दवा ले तो बच्चे का होगा बचाव
कांउसलर का कहना है कि अगर किसी गर्भवती महिला को एड्स है तो उसे नियमित रूप से दवा लेनी चाहिए। अगर वह नियमित दवा लेती है तो उसके बच्चे को एड्स होने की संभावना बहुत ही कम होती है।
लक्षण
-लगातार बुखार होना।
- मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द होना।
- त्वचा पर लाल चकत्ते होना।
- जी मिचलाना, उल्टी व दस्त होना।
- गले में खराश और मुंह में घाव होना।
- शरीर का वजन कम होना।
- सूखी खांसी और रात को पसीना आना।