शामली जिले के ग्रामीण क्षेत्र में काफी लोग बेघर भी हैं, लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे करीब 2400 परिवार हैं, जिनके पास आवास नहीं है या कच्चे और झोपड़ीनुमा आवास में रहते हैं। योजना में चयन के सरकारी मापदंड की बेड़ियों की वजह से इन गरीबों को आवास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले दो साल से लाभार्थियों का चयन नहीं हो पा रहा है।
केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री ग्रामीण एवं शहरी आवास योजना में लाभार्थियों को अलग अलग मापदंड रखे गए हैं। वर्ष 2011 की सामाजिक व जातिगत सर्वे को आधार मानकर योजना में लाभार्थियों का चयन किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में 1811 ऑनलाइन आवेदन पत्र प्राप्त हुए। इस सूची का जिला प्रशासन द्वारा सत्यापन भी कराया गया। उसमें 2011 के सर्वे के मुताबिक 29 लाभार्थी पाए गए थे। वर्ष 2016-17 में 28 लाभार्थी सूचीबद्ध किए गए, जिनमें शामली ब्लाक एकमात्र ऐसा था, जहां पात्र लाभार्थी नहीं मिला था। पात्र लाभार्थियों में कैराना ब्लाक में 6, थानाभवन ब्लाक एक, ऊन ब्लाक 11,कांधला ब्लाक 10 शामिल थे। अधिकारियों के मुताबिक 28 लाभार्थियों को वर्ष 2016-17 में आवासीय योजना का लाभ दिया गया। वहीं, वर्ष 2017-18 मे योजना में चार का लक्ष्य मिला था, जिसके लिए कोई भी पात्र नहीं मिला। वर्ष 2018-19 में भी चार का लक्ष्य मिला है, मगर योजना में पात्र लाभार्थी नहीं मिल पा रहे हैं। ग्राम्य विकास विभाग के परियोजना निदेशक ज्ञानेश्वर तिवारी ने बताया कि वर्ष 2011 की सामाजिक व जातिगत जनगणना के अनुसार जिले में पात्र लाभार्थी नहीं मिला। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आवास विहीन लोगों का सर्वे कराया जा रहा है, जिसमें 2400 व्यक्ति पाए गए हैं। ऐसे आवासविहीन लोगों को केंद्र सरकार लाभ दिए जाने की अनुमति नहीं दे रही है। क्योंकि वर्ष 2011 की सामाजिक व जातिगत आनलाइन आवदेकों को पहले लाभान्वित करना है।
योजना में पात्र लाभार्थियों के मापदंड
2011 की सामाजिक एवं जातिगत गणना के आधार पर आवासविहीन, कच्चा आवास एक कमरा, कच्चा आवास कमरे, भिखारी परिवार, मैला ढोने वाला परिवार, वैधानिक रूप से मुक्त बंधुआ मजदूूर परिवार, वह परिवार जिनके परिवार में पुरुष व महिला 16 से लेकर 59 वर्ष की आयु तक कोई वयस्क सदस्य न हो, वह परिवार जिसमें 25 वर्ष से ऊपर आयु का व्यस्क सदस्य न हो।