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Shamli News: माननीय बनने की होड़ में चढ़ा सियासी पारा

Fri, 03 Apr 2026 12:24 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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शामली। विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ने लगा है। शामली सीट के लिए घमासान इस कदर मचा है कि हर दावेदार अपने को प्रत्याशी मानकर तैयारी में जुटा हुआ है। भाजपा-रालोद गठबंधन ने सरगर्मियां और बढ़ा दी है, जिससे सियासी गलियारों में जेठ जैसी तपन महसूस होने लगी है। नेताजी दिल्ली से लखनऊ तक की दौड़ लगा रहे हैं।
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गठबंधन की राजनीति ने इस बार मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। भाजपा और रालोद के बीच सीट किसके खाते में जाएगी, इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में दोनों दलों के नेता समानांतर तरीके से अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। परिसीमन के बाद वर्ष 2012 में अस्तित्व में आई शामली विधानसभा सीट का सियासी इतिहास भी दिलचस्प रहा है। पहले चुनाव में कांग्रेस के पंकज मलिक ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2017 में भाजपा की लहर में तेजेंद्र सिंह निर्वाल विधायक बने। वर्ष 2022 में सपा-रालोद गठबंधन के तहत चुनाव लड़ते हुए रालोद के प्रसन्न चौधरी ने भाजपा के तेजेंद्र निर्वाल को हराकर सीट पर कब्जा किया। वर्ष 2024 में रालोद के एनडीए में शामिल होने के बाद समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। अब इस सीट पर भाजपा और रालोद दोनों की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है, जिससे अंदरूनी प्रतिस्पर्धा भी बढ़ गई है।



रालोद के कई चेहरे मैदान में

मौजूदा विधायक प्रसन्न चौधरी एक बार फिर टिकट की दावेदारी ठोक रहे हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय अध्यक्ष योगेंद्र चेयरमैन, विक्रांत जावला और किवाना निवासी बिजेंद्र सिंह मलिक टिकट दावेदारों की लाइन में है। ये सभी नेता लगातार जनसंपर्क और सामाजिक कार्यक्रमों के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। रालोद नेता दिल्ली में चौधरी जयंत से मुलाकात कर चुके हैं।
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भाजपा में भी दावेदारों की लंबी कतार

पूर्व विधायक और पूर्व जिलाध्यक्ष तेजेंद्र सिंह निर्वाल तीसरी बार मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। नगर पालिका चेयरमैन अरविंद संगल भी पहली बार दावेदारी पेश कर रहे हैं और क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा दी है। इसके अलावा हाथी करौदा के हरबीर मलिक का नाम भी चर्चा में है।



सपा में अभी दावेदार कम

समाजवादी पार्टी में भी टिकट को लेकर अंदरखाने खींचतान चल रही है। पूर्व विधायक राजेश्वर बंसल के बेटे अखिल बंसल प्रमुख दावेदार के रूप में उभरे हैं। उन्होंने लखनऊ में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर अपनी दावेदारी भी मजबूत की है।


बसपा और कांग्रेस भी पीछे नहीं

बसपा से राजेंद्र उपाध्याय और कुड़ाना के बिजेंद्र मलिक मैदान में सक्रिय हैं। बिजेंद्र मलिक 2022 में भी चुनाव लड़ चुके हैं। वहीं कांग्रेस में पूर्व जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा और सींगरा के अश्वनी शर्मा टिकट के लिए प्रयासरत हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टिकट की दौड़ में सिर्फ जमीनी पकड़ ही नहीं, बल्कि संगठन में मजबूत पकड़ और सिफारिश भी अहम भूमिका निभाएगी।
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फैक्ट फाइल – शामली विधानसभा सीट

गठन : 2012 (परिसीमन के बाद)

2012: पंकज मलिक (कांग्रेस) – 3,741 वोट से जीत

2017: तेजेंद्र निर्वाल (भाजपा) – 29,720 वोट से जीत

2022: प्रसन्न चौधरी (रालोद) – 7,107 वोट से जीत
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