शामली। कैराना पलायन प्रकरण के मुख्य आरोपी और एक लाख रुपये के इनामी बदमाश फुरकान के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। 17 जुलाई को कैराना में आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि प्रदेश में अपराधियों के लिए केवल दो ही जगह हैं—जेल या जहन्नुम। इसके 19 दिनों बाद फुरकान का एनकाउंटर होने से राजनीतिक हलकों में इस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
किराना घराने से देशभर में पहचान बनाने वाला कैराना, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति का भी सबसे चर्चित और अहम चुनावी केंद्र रहा है। भाजपा वर्ष 2016 से कैराना पलायन के मुद्दे को लगातार उठाती रही है। रंगदारी, व्यापारियों की हत्याओं और पलायन की घटनाओं को पार्टी ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में प्रमुख मुद्दा बनाया। इसी मुद्दे ने भाजपा को कई चुनावों में राजनीतिक लाभ भी दिलाया।
फुरकान लंबे समय से रंगदारी, हत्या और संगठित अपराध के मामलों में वांछित था। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब भाजपा यह संदेश देने का प्रयास करेगी कि उसकी सरकार में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। पार्टी पहले भी कैराना पलायन के मुद्दे को विधानसभा और लोकसभा चुनाव में प्रमुखता से उठा चुकी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही आज कैराना में हालात सामान्य हैं और व्यापारियों में पहले जैसा भय नहीं है, लेकिन पलायन का मुद्दा भाजपा के चुनावी एजेंडे से कभी पूरी तरह बाहर नहीं हुआ। फुरकान के एनकाउंटर के बाद यह मुद्दा एक बार फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है।
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा कानून-व्यवस्था और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को बड़ा मुद्दा बना सकती है। माना जा रहा है कि पार्टी कैराना पलायन और फुरकान एनकाउंटर को जोड़कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल बनाने का प्रयास करेगी। वहीं विपक्ष भी इस मुद्दे पर अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। संवाद
भाजपा जिलाध्यक्ष बोले...
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही साफ कर चुके हैं कि अपराधियों के लिए प्रदेश में केवल जेल या जहन्नुम ही जगह है। सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। फुरकान का एनकाउंटर इसी नीति का परिणाम है। अन्य अपराधियों पर भी जल्द प्रभावी कार्रवाई होगी। — रामजी लाल कश्यप, जिलाध्यक्ष, भाजपा
पलायन का मुद्दा बना तो भाजपा ने जीती थी कैराना लोकसभा सीट
वर्ष 2016 में कैराना पलायन का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। इसके बाद 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कानून-व्यवस्था और पलायन को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया। 2018 लोकसभा उपचुनाव में रालोद की तबस्सुम हसन ने जीत दर्ज की, लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर पलायन और कानून-व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। इसका लाभ पार्टी को मिला और भाजपा प्रत्याशी प्रदीप चौधरी ने कैराना लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की। हालांकि अब सपा से इकरा हसन सांसद हैं।