कैराना में गश्त करते पुलिसकर्मी और अर्द्धसैनिक बल।
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अपनी फुलप्रूफ प्लानिंग में पास हो गया पुलिस प्रशासन
शामली। अयोध्या प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पूर्व पुलिस प्रशासन कई दिनों से तैयारी में जुटा था। अंदरखाने सब प्लानिंग बन रही थी। फोर्स की तैनाती के साथ सबसे ज्यादा फोकस जनसंवाद पर रहा। अफसरों ने सभी वर्गों के लोगों के बीच जाकर जनसंवाद कायम किया और पुलिस की यही फुलप्रूफ प्लानिंग काम आई।
पुलिस की प्लानिंग का ही हिस्सा था कि शनिवार को सुबह सवेरे ही जब लोग सोकर उठे चप्पे चप्पे पर खाकी नजर आई। चौराहों, बस अड्डों ,बाजारों सब जगह फोर्स तैनात था। लोग भी देेखकर हैरान थे । पुलिस प्रशासन को पता था कि सांप्रदायिक मसलो में पब्लिक के ही लोग पब्लिक को मेनैज कर सकते हैं। लिहाजा आला अफसरों ने पहले ही जिले के तमाम शहर ,कस्बे और बड़े गांवों के अलावा संवेदनशील गांवों के दोनों वर्गों के गण्यमान्य लोगों से संवाद कायम कर लिया था। उनके मोबाइल नंबर जुटा लिए गए थे. जिनसे लगातार संपर्क किया गया। लोगों को समझाया गया था कि फैसला कोई भी आए वह लोग जनता के बीच जाकर उनसे शांति और भाईचारे की अपील करेंगे। प्रशासन की यही प्लानिंग काम आई और संवेदनशील कैराना, कांधला, झिंझाना और शामली शहर में सभी वर्ग के गणमान्य लोग निर्णय आते ही लोगों से भाई चारे की अपील करने निकल गए ।
प्रशासन ने तमाम पुलिस और जिला स्तरीय अफसरों को सेक्टर और जोनल मजिस्ट्रेट बनाकर उनकी तैनाती तय कर दी थी उन्हें सब कुछ ब्रीफ किया जा चुका था। शुक्रवार रात जैसे ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने की जानकारी हुई तुरंत सभी को मेसेज कर दिया गया। नतीजा रहा कि शनिवार की सुबह आठ बजे ही तमाम अधिकारी अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद खड़े नजर आए। साइबर सेल और एक्सपर्ट 12 पुलिस कर्मियों की ़ड्यटी केवल इसी काम में लगाई गई। इसी के चलते सोशल मीडिया पर कमेंट के दो बड़े मामले पकड़े गए और उन पर कार्रवाई हुई। एसपी शामली अजय कुमार ने कहा कि शामली वासियों ने बहुत समझदारी और जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दिया है उनकी इसी समझारी से सब कुछ शांत रहा।