शामली में संत निरंकारी महिला समागम में देहरादून से आई प्रचारक उषा अरोरा ने कहा कि साध- संगत की महत्ता तभी है, जब मन में विनम्र बनकर संगत की जाती है।
रविवार को नगर के गगन गार्डन में संत निरंकारी महिला समागम में बतौर मुख्य वक्ता देहरादून से आई प्रचारक बहन उषा ने कहा कि यदि मनुष्य अभिमानी हो जाए, और अपने आप को संपूर्ण मान बैठे तो सीखने की भावना समाप्त हो जाती है। आगे बढ़ने के अवसर खत्म हो जाते हैं।
इंसान का पतन शुरू हो जाता है। संगत के बिना कभी इस मन को विवेक नही मिल सकता। यह विवेक बुद्धि बन नही सकती है। प्रचारक उषा बहन ने कहा कि मनुष्य को अपने मन को प्रभु के साथ जोड़ना होगा। जिस मनुष्य के जीवन में परमात्मा का नाता नहीं जुड़ता तो जीवन में शीतलता नहीं मिलती।
इस मौके पर संत निरंकारी महिला समागम में गीतों लघु नाटिकाओं के माध्यम से निरंकारी मिशन का संदेश दिया गया। समारोह में हरीश चंद, सहायक जोनल इंचार्ज कुलभूषण चौधरी, संजीव, धीर सिंह, जगदीश प्रसाद, रामनाथ, राजेश चौहान, कुणाल, महावीर सिंह, विजय, डाक्टर राजकुमार, धर्मेद्र कुमार अनमोल मौजूद रहे।