निस्वार्थ मन से की जाने वाली प्रभु भक्ति होगा अहंकार का नाश
कांधला। सिद्धपीठ सूरज कुंड महादेव मंदिर एवं शनिधाम पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह का विधि विधान के साथ शनिवार को समापन किया गया।
केदारनाथ से पधारे आचार्य बृज मोहन सेमवाल ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रभु भक्ति अहंकार को समाप्त करती है। मनुष्य को निस्वार्थ और निश्चल मन से प्रभु का गुणगान, भक्ति, साधना, तपस्या करनी चाहिए। एक बार भगवान विष्णु का भार धारण करने वाले गरुड़ और सुदर्शन चक्र को अहंकार हो गया था कि श्री हरि नारायण का हमसे बड़ा भक्त कोई नहीं हो सकता, लेकिन भगवान श्री हरि नारायण के परम भक्त बजरंगबली हनुमान ने निश्चल भक्ति का प्रमाण देते हुए उनके अहंकार को धराशाई कर दिया था। इसलिए प्रभु केवल निश्चल भक्ति करने वाले व्यक्ति को ही अपना कृपा पात्र बनाते हैं। कथा प्रभारी शशि भूषण शर्मा ने साप्ताहिक कार्यक्रम के दौरान मंदिर समिति के अध्यक्ष पंकज गर्ग समेत सभी श्रद्धालुओं का सहयोग करने पर आभार व्यक्त किया। इस दौरान भाजपा नेता नरेश सैनी, साहब सिंह सैनी, जितेंद्र सैनी, सुभाष सैनी, बाबूराम कश्यप, शिव कुमार, रिक्की रावत, सतबीर मास्टर, गुड्डू, सुभाष कश्यप आदि मौजूद रहे।