संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जनपद में सक्रिय तेल तस्करी गिरोह केवल सस्ता पेट्रोल बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि अब मिलावटी ईंधन की सप्लाई किए जाने की आशंका भी गहरा गई है।
संवाददाता द्वारा कैराना और बागपत के बड़ौत क्षेत्र से तेल माफिया से खरीदे गए पेट्रोल के सैंपलों की शहर के एक पेट्रोल पंप पर डेंसिटी जांच कराई गई, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। दोनों सैंपलों की डेंसिटी निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई, जिससे ईंधन में मिलावट की आशंका जताई जा रही है।
दरअसल, संवाददाता ने स्टिंग के दौरान गिरोह के सदस्यों से दो लीटर पेट्रोल अलग-अलग बोतलों में 70 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से खरीदा था। गिरोह के सदस्यों ने दावा किया था कि वे 70 से 75 रुपये प्रति लीटर की दर से विभिन्न स्थानों तक पेट्रोल और डीजल की सप्लाई करते हैं। इस दौरान उन्होंने वे ड्रम भी दिखाए, जिनके माध्यम से बड़े स्तर पर तेल की तस्करी की जा रही है।
इसके बाद दोनों सैंपलों को शहर के एक पेट्रोल पंप पर जांच के लिए ले जाया गया। जांच में एक सैंपल की डेंसिटी 765 और दूसरे की 784 पाई गई, जबकि सामान्य रूप से पेट्रोल की डेंसिटी 700 से 750 के बीच मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डेंसिटी अधिक होने का मतलब पेट्रोल में मिलावट या एथेनॉल जैसी अन्य सामग्री की मात्रा अधिक होना हो सकता है।
पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सूर्यवीर सिंह ने बताया कि भारत में पेट्रोल और डीजल की डेंसिटी 15 डिग्री सेल्सियस तापमान के आधार पर मापी जाती है। उन्होंने कहा कि यदि डेंसिटी तय मानक से अधिक या कम मिले तो ईंधन की गुणवत्ता संदिग्ध मानी जाती है। ऐसे पेट्रोल के लगातार इस्तेमाल से वाहनों के इंजन, माइलेज और परफॉर्मेंस पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
n डेंसिटी ज्यादा होने पर वाहनों के इंजन को हो सकता है नुकसान : ऑटो रिपेयरिंग कार्य से जुड़े आजाद ने बताया कि पेट्रोल और डीजल की डेंसिटी निर्धारित मानकों से अधिक होना ईंधन में मिलावट की आशंका को बढ़ाता है। ऐसे ईंधन के लगातार इस्तेमाल से वाहनों के इंजन पर बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि मिलावटी पेट्रोल या डीजल के कारण इंजन में कार्बन जमने लगता है, जिससे वाहन अधिक धुआं छोड़ने लगता है और माइलेज भी प्रभावित होता है।
ऐसे ईंधन का प्रयोग करने पर इंजन के महत्वपूर्ण पार्ट्स खराब हो सकते हैं। इसलिए वाहन चालकों को हमेशा विश्वसनीय पेट्रोल पंपों से ही ईंधन भरवाना चाहिए और संदेह होने पर डेंसिटी की जांच करानी चाहिए। (संवाद)
स्टिंग...वह पेट्रोल जो तेल माफियाओं से खरीदा गया था- फोटो : Samvad