शामली शुगर मिल में किसानों का तीसरे दिन भी धरना जारी रहा। किसानों ने गन्ने की तौल नहीं होने दी। जिस कारण शुगर मिल भी नहीं चली। जिससे शहर के मिल रोड पर गन्ने का अंबार लग गया। मिल प्रबंधन ने वार्ता का प्रस्ताव भेजा, लेकिन किसानों ने दो टूक कह दिया कि भुगतान की व्यवस्था करने के बाद ही वार्ता होगी।
शुक्रवार सुबह ही कई गांवों के किसान धरना स्थल पर पहुंचने शुरू हो गए थे। गन्ना समिति के डायरेक्टर पुष्पेंद्र निर्वाल, पूर्व डायरेक्टर जितेंद्र निर्वाल, किसान नेता देशपाल राणा आदि भी धरने पर पहुंचे। किसानों ने कहा कि शामली मिल भुगतान के मामले में सबसे ज्यादा परेशान करने लगी है। कई बार वार्ता हुई, लेकिन अधिकारियों ने केवल आश्वासन दिया। अब साफ्ट लोन का बहाना कर भुगतान लटका दिया है। पिछले सीजन का भी बकाया भुगतान नहीं हुआ। कुछ किसानों का कहना था कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही 14 दिन में भुगतान का वादा किया था। गन्ना मंत्री भी इसी जिले के हैं। उन्हें भी किसानों की सोचनी चाहिए। मिल वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इस मौके पर देशपाल राणा, धर्मवीर निर्वाल, जितेंद्र निर्वाल, रामपाल बलवा, नाजिम, वसीम, हरीश, संजीव तोमर, प्रमोद राणा, पप्पू टिटौली, सुधीर निर्वाल आदि शामिल थे।
भुगतान के साथ आए वार्ता करने
शामली। गन्ना समिति के डायरेक्टर पुष्पेंद्र देेशपाल राणा ने बताया कि मिल प्रबंधन ने किसानों से वार्ता का प्रस्ताव भिजवाया था, लेकिन धरने पर बैठे किसानों ने साफ कह दिया कि वार्ता कई बार हो चुकी है। हर बार उन्हें झूठा आश्वासन दे दिया जाता है। उन्होंने दो टूक कहा कि गन्ने का भुगतान की व्यवस्था के बाद ही उनसे वार्ता करने आएं। इसके बाद मिल प्रबंधन की ओर से वार्ता को कोई नहीं आया।
बिजली वाले काट रहे कनेक्शन
धरने पर कुछ किसानों ने कहा कि भुगतान नहीं होने की वजह से उनके बिजली के बिल जमा नहीं हुए। बिजली वाले आकर कनेक्शन काटने की धमकी देते हैं। एफआईआर कराने को धमकाते हैं। कहते हैं कि उन्हें गन्ने के भुगतान से कोई मतलब नहीं। उनका बकाया जल्दी दो। ऐसे में किसान क्या करे।
कैसे घर चलाएं
किसानों ने कहा कि जिले में 70 प्रतिशत किसानों का घर गन्ने के भुगतान से ही घर चलता है। यदि भुगतान भी समय से नहीं मिलेगा तो घर कैसे चलाएंगे। किसान पर भी बच्चों को पढ़ाने लिखाने के अलावा घर चलाने की भी जिम्मेदारी होती है। भुगतान के चक्कर में वह लोग घरों की जिम्मेदारियां भी सही ढंग से नहीं निभा पा रहे।
शहर में लगा गन्ने का अंबार
शुगर मिल में गन्ना लेकर बड़ी संख्या में किसान वाहनों से पहुंचे लेकिन धरने के चलते तौल बंद रही। किसानों ने तौल नहीं होने दी। जिससे शहर में मिल रोड गन्ने के वाहनों से जाम हो गई। पूरी रोड पर जाम लग गया। सुबह कुछ देर के लिए एमएससके रोड भी जाम हुई लेकिन बाद में किसान अपने वाहन वापस ले गए इसके बाद कुछ राहत मिली।
जाम लगाने की सहमति नहीं
धरने पर बैठे किसानों ने बताया कि कुछ किसान गन्ने के वाहनों को शहर में लाकर जाम लगाने की बात कर रहे थे, लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया। कहा कि उनका धरना शांतिपूर्ण है और वे किसी भी जाम या अशांति की बातें नहीं करेंगे।
अलग अलग गांवों पर खाने की जिम्मेदारी
शामली। धरने पर बैठे किसानों ने धरना स्थल पर ही भट़ठी चढ़ाई और खाना बनाया। सुबह चाय नाश्ते में पकौडी। दिन में दाल चावल और रात को आलू पूरी आदि की व्यवस्था थी। किसानों ने बताया कि खाने की व्यवस्था रोजाना अलग अलग गांव के किसानों ने ली है। किसान ही अपने गांवों से खाना,दूूध और मट्ठे की व्यवस्था कर रहे हैं।