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Shamli News: 32 गांवों में ध्वस्तीकरण के नोटिस पर मचा हड़कंप

Wed, 24 Dec 2025 12:35 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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जनपद शामली के गांव रामडा में 1954 में वन विभाग को दी गई जमीन, जिस पर छाया संकट-संवाद
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शामली/ बिडौली। खादर क्षेत्र की 32 ग्राम पंचायतों में रहने वाले हजारों किसानों और ग्रामीणों की करीब चार हजार एकड़ भूमि पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। वन विभाग ने जमीन को अपनी बताते हुए ग्रामीणों को नोटिस जारी कर जल्द से जल्द भूमि खाली करने के निर्देश दिए हैं। ध्वस्तीकरण की चेतावनी तक दी गई है। नोटिस मिलते ही गांवों में खलबली मच गई है। किसानों, ग्रामीणों ने आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।
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वर्ष 1954 में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा मिर्जापुर, उन्नाव, चित्रकूट व शामली समेत नौ जनपदों में वन विभाग को भूमि आवंटित की गई थी। इसके लिए तत्कालीन गवर्नर की ओर से गजट भी जारी हुआ था। हालांकि, यह भूमि अभिलेखों में वन विभाग के नाम दर्ज नहीं हो सकी। इसके चलते यह जमीन ग्राम पंचायत के अधीन रही और वर्ष 1960, 1972, 1975 व 1978 में पंचायत ने किसानों को यह जमीन पट्टे पर दे दी। तभी से किसान इस भूमि पर काबिज होकर खेती करते आ रहे हैं।
शामली जिले के खादर क्षेत्र के रामड़ा, पठेड, बरनावी, मवी, मलकपुर, अकबरपुर सुनहटी समेत 32 गांवों की लगभग चार हजार एकड़ भूमि को अब वन विभाग अपनी बता रहा है। बताया जा रहा है कि 40 हजार से अधिक किसानों और ग्रामीणों को नोटिस भेजे गए हैं। वन विभाग के अनुसार, 1995 में धारा-4 के तहत राज्यपाल द्वारा गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया था, लेकिन भूमि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाई। सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान और एनजीटी के आदेश के बाद अब विभाग व प्रशासन ने जमीन को राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराकर कब्जामुक्त कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
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कागजात नहीं मिल रहे, भटक रहे किसान
गांव पठेड के सोहन तहसील से जमीन की नकल लेने पहुंचा तो उसे नकल नहीं मिल सकी। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। अब किसान तहसील के चक्कर काट रहे हैं और भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

अब कहां जाएंगे हम
झिंझाना क्षेत्र के गांव अशरफपुर निवासी अनवर ने बताया कि उनकी करीब 40 बीघा जमीन प्रभावित है। गलती अधिकारियों की रही, लेकिन खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। जमीन गई तो परिवार सड़क पर आ जाएगा।

हमारी क्या गलती
रामड़ा निवासी मुस्तकीम का कहना है कि उनके गांव की करीब 1950 बीघा जमीन विवाद में है। 1954 में आवंटन के बाद यदि समय रहते अभिलेख दुरुस्त होते तो आज यह स्थिति नहीं आती। पट्टे पंचायत ने दिए, खेती किसान कर रहे हैं, फिर गलती हमारी कैसे हुई?


कैसे चलेगा घर
पठेड के किसान विक्रम सिंह ने बताया कि यमुना कटान में उनकी कुछ जमीन पहले ही जा चुकी है। अब बची नौ बीघा जमीन पर भी संकट है। अगर यह भी चली गई तो परिवार का पेट पालना मुश्किल हो जाएगा।

कर्ज लेकर बनाया था घर
बीबीपुर के मजरे बानीपुर निवासी मलाखा ने कहा कि पीढ़ियों से गांव में रह रहे हैं। कर्ज लेकर मकान बनवाया था। नोटिस के बाद समझ नहीं आ रहा कि अब कहां जाएं।

सुबूत हैं, फिर भी नहीं सुनवाई
बानीपुर के नरेश कुमार ने बताया कि गांव की 300 बीघा से अधिक जमीन विवादित है। ग्रामीणों के पास कागजात हैं और वे सुबूत देने को तैयार हैं, लेकिन वन विभाग मानने को तैयार नहीं है।

इन गांवों के लोगों को भेजे गए नोटिस

रंगाना, बीबीपुर जलालाबाद, पावटी खुर्द, खेड़ी खुशनाम, गढ़ी हुसनपुर, खोडसमा, सकौती, मंसूरा, बल्हेड़ा, शीतल गढ़ी, यूसुफपुर चोतरा, दभेड़ी बुजुर्ग, रितौंद, अलीपुरा, भड़ी, मुस्तफाबाद, भागी माजरा, नाई नगला, अशरफपुर, टोडा, मछरौली, चौसाना, अजीजपुरा, अकबरपुर सुनहटी, मलकपुर, बसेड़ा, सहपत, पठेड, बरनावी, बीबीपुर हटिया और रामड़ा। इसके अलावा 33वां गांव राणा माजरा अब हरियाणा में शामिल है।
एनजीटी के आदेश के तहत ही 32 गांवों में जमीन को कब्जामुक्त कराया जा रहा है। यदि ग्रामीणों ने स्वयं जमीन खाली नहीं की तो ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। - जगदेव सिंह, डीएफओ

जनपद शामली के गांव रामडा में 1954 में वन विभाग को दी गई जमीन, जिस पर छाया संकट-संवाद

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