शामली। ग्रामीण अंचल की राजनीति की धुरी किसान और मजदूर हैं। इनकी पीड़ा अनेक । बिजली से लेकर खस्ताहाल सड़कें। गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं, वहीं स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी सुविधाओं का अभाव। ताज्जुब है कि ये सभी मुद्दे जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के चुनाव से गायब हैं। कोई पैसे के बल पर चुनाव जीतना चाहता है, तो कोई जातिगत आंकड़ों से ध्रुवीकरण कराकर। जनता चाहती है जनसमस्याएं चुनाव में मुद्दा बने, प्रत्याशियों की इसकी चिंता ही नहीं है।
अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए प्रत्याशियों द्वारा धुआंधार प्रचार किया जा रहा है। गांव दर गांव सभाएं हो रही हैं, उनमें किसी प्रत्याशी के मुंह से गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर मुद्दा नहीं बनाया जाता। जोड़ तोड़ की राजनीति हावी है। अपनी जाति बिरादरी के वोटरों को लामबंद करने का प्रयास किया जाता है, तो दूसरे प्रत्याशी की जाति के वोटरों में लोभ लालच देकर घुसपैठ की जाती है। वोटरों के दिल में भी यह दर्द है। कुछ लोगों से बात की, तो यही दर्द उनकी जुबां पर छलक आया और बोल उठे, किसे सुनाए, कौन सुनेगा, यहां तो भीड़ तंत्र चल रहा है।
छिपी नहीं है जिले की हालत
चीनी मिलों पर करीब 193 करोड़ रुपया बकाया है। ऊन शुगर मिल पर गन्ना मूल्य भुगतान के लिए भाकियू ने आंदोलन किया। भुगतान का आश्वासन मिला, भुगतान नहीं। बिजली आपूर्ति इस कदर लड़खड़ाई हुई है कि 10 घंटे से ज्यादा बिजली नहीं मिलती। शामली से गढ़ी पुख्ता, झिंझाना से ऊन, ऊन से चौसाना, थानाभवन से बाबरी समेत जिले के विभिन्न मार्गों की हालत खराब है। स्वास्थ्य सेवाओं का हाल ये है कि कैराना, कांधला और ऊन क्षेत्र में बुखार फैलने से दर्जनों लोगों की मौत हो गई। अस्पतालों में डॉक्टर नहीं मिलते, तो दवा का भी टोटा रहता है। जिला मुख्यालय को कस्बों से जोड़ने में यातायात व्यवस्था भी ठीक नहीं है।
बातचीत के अंश
बिजली आपूर्ति बेहद खराब है। पर्याप्त बिजली आपूर्ति न होने से रोजगार प्रभावित होता है। चुनाव लड़ने वालों ने बिजली आपूर्ति को मुद्दा ही नहीं बनाया, इसका बड़ा दुख है। - हनीफ गांव भैंसवाल
चुनाव के दौरान कोई ऐसा वादा प्रत्याशी नहीं कर रहे, जिससे आम जनता को लाभ हो। बस जातिगत आधार पर चुनाव हो रहे हैं। लोकतंत्र के लिए यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। - रामदिया, गांव भैंसवाल
जिले में सड़कों की हालत खराब है। बिजली आपूर्ति नहीं है, पेयजल आपूर्ति भी खराब है। ये मुख्य मुद्दे पंचायत चुनाव में गायब हैं, जिनसे जनता सीधे जुड़ती है। - योगेंद्र, भैंसवाल
गन्ना मूल्य चीनी मिलों पर बकाया है। चीनी मिले समय पर नहीं चल रहीं। धान की फसल का भी उचित मूल्य नहीं मिलता। ये मुद्दा प्रत्याशियों ने नहीं उठाया। किसी प्रत्याशी को किसानों को चिंता नहीं है। - सतेंद्र , भैंसवाल
ऐसे प्रत्याशी को वोट दें, जिसको जानते हैं और जो आम जनता और किसानों के हित में लड़ता है। जिसका लक्ष्य अपने क्षेत्र की सेवा करना हो। धनबल से वोट लेने वाले को सबक सिखाएं। जिस प्रत्याशी के एजेंडे में बिजली, पानी, गन्ना, मजदूर शामिल नहीं है, ऐसे प्रत्याशियों का बहिष्कार करना चाहिए। - राजवीर सिंह मुंडेट, भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष
-
चुनाव से असली मुद्दे गायब हैं। जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत ग्रामीण अंचल की राजनीति से जुड़े हैं, किसान और मजदूरों की चिंता किसी पार्टी के प्रत्याशी को नहीं है। किसान हित की बात करने वाले को वोट देकर जिताना चाहिए। - चौधरी सूरजमल, बतीसा खाप