शामली। महाशिवरात्रि पर इस बार भगवान आशुतोष के भक्तों को नौ साल बाद दुर्लभ पंचगृह-अमृत सर्वसिद्धि योग का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। शिवालयों में रविवार को सुबह चार बजे से पूजा-अर्चना और जलाभिषेक का क्रम शुरू होगा। पूरे दिन और रात्रि में चारों पहर पूजा-अर्चना तथा जलाभिषेक होता रहेगा।
इस वर्ष महाशिवरात्रि पर सूर्य, चंद्रमा, शुक्र, राहु और बुध के साथ-साथ अमृत सिद्धि योग बन रहा है। शनिवार शाम पांच बजे द्वादशी समाप्त होने के बाद त्रयोदशी शुरू हो गई, जो रविवार शाम पांच बजकर चार मिनट तक चलेगी। इस समय त्रयोदशी और चतुर्दशी का मिलन, यानी शिव-पार्वती मिलन का पवित्र संयोग बनता है।
पंडित कुशलानंद शास्त्री के अनुसार महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा-आराधना और रुद्राभिषेक का समय रविवार को सुबह 7.15 बजे से 9 बजे तक, शाम चार बजे से मध्यरात्रि एक बजे तक और मध्यरात्रि एक बजे से सुबह चार बजे तक रखा गया है। इस अवसर पर दूध, गंगाजल और दही से किया गया जलाभिषेक अत्यंत पवित्र माना जाता है।