शामली। आतंकी घटनाओं और सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को घेरा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा। भारतीय सेना की तारीफ करते हुए कहा कि सैनिकों में इतना दम है कि सीमा पार घुसकर भी मुंहतोड़ जवाब दे सकते हैं।
कैराना में जनसभा के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ दिनों पूर्व में पाकिस्तान गया था, तो सीना ठोककर पाकिस्तान से कहा था कि तुम आतंकवाद को बढ़ावा देते हो। इस पर पाकिस्तान तिलमिला गया था। वहां अन्य देशों के नेता भी आए हए थे। उन्होंने भी आतंकवाद पर पाकिस्तान की मुखालफत की।
तब हमने पाकिस्तान का भोजन तक नहीं किया और कह दिया कि आतंकियों का साथ देना बंद करो। राजनाथ सिंह ने कहा कि उरी में जो हुआ उसके बाद सैनिकों ने आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब दिया और आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूत कर दिया था। हमें सेना के जवानों पर गर्व है, वह सीमा पार भी दुश्मन को सबक सिखाना जानते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद कायरों का हथियार है, बहादुरों का नहीं।
यह नेता रहे मंच पर मौजूद
जनसभा के दौरान मंच पर सांसद हुकुम सिंह, सांसद डाक्टर संजीव बालियान, सांसद कृष्णपाल गुर्जर, सांसद राघव लखनपाल, सांसद सत्यपाल सिंह, विधायक सुरेश राणा, क्षेत्रीय अध्यक्ष देवेंद्र चौधरी, परिवर्तन यात्रा के क्षेत्रीय संयोजक विमल शर्मा, विधायक प्रदीप चौधरी, प्रदेश उपाध्यक्ष जसवंत सैनी, जिला पंचायत अध्यक्ष संतोष देवी, डाक्टर धर्म सिंह सैनी, जिला प्रभारी संजय कश्यप और जिलाध्यक्ष पवन तरार मौजूद रहे। मंच संचालन डाक्टर मनोज शर्मा और राजन बत्रा ने किया।
पीड़ितों के घर तक नहीं जा सके
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह पब्लिक इंटर कॉलेज में बने हेलीपैड से कार में विजय सिंह पथिक डिग्री कॉलेज के मैदान पर आए। करीब दो घंटे तक वह कैराना में रहे, मगर उन लोगों के घर तक नहीं जा सके जिनके परिवार के सदस्यों की रंगदारी न देने पर हत्या कर दी गईं। कैराना पलायन प्रकरण ऐसे ही मामलों की वजह से पैदा हुआ।
कैराना के व्यापारी शिवकुमार, राजेंद्र और विनोद गोयल की बदमाशों ने रंगदारी न देने पर हत्या कर दी थी। उसके बाद भी कैराना के व्यापारियों को रंगदारी की धमकी मिलनी बंद नहीं हुई। दर्जनों लोग अपने मकान और दुकानें बंद करके दूसरे स्थानों पर चले गए। आज भी उन मकानों पर ताले लटके हैं। उन लोगों के परिजनों को भी उम्मीद थी कि जब केंद्रीय गृहमंत्री कैराना आएंगे, तो उन्हें अपना दुखड़ा सुनाएंगे, मगर ऐसा हो न सका।