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जिले में मानसून की बेरुखी, धान की फसल पर पड़ेगी भारी

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संवाद न्यूज एजेंसी
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शामली। मानसून के रूठ जाने से धान की रोपाई भी पिछड़ रही है। इसके परिणामस्वरूप दस से लेकर पंद्रह फीसदी किसान धान छोड़कर मक्का व उर्द का रुख कर सकते हैं।
जिले में 20 हजार 523 हेक्टेयर में धान की फसल की बुआई होती है। इस साल शासन से 30 हजार 523 हेक्टेयर लक्ष्य मिला है। समय पर बारिश न होने से किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 में लक्ष्य पूरा हो गया था। इस बार डेढ़ माह में महज 16 हजार 423 हेक्टेयर में धान की रोपाई हो सकी है। इसके चलते किसान मक्का और उर्द की बुआई कर सकते हैं। उधर, जिला कृषि अधिकारी प्रदीप यादव ने बताया कि पिछले सालों की अपेक्षा पचास फीसदी से कम बारिश हुई है। इससे धान की रोपाई पिछड़ गई है। इसके चलते लक्ष्य से पिछड़ सकते हैं।
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कम बनेंगी बालिया
बीते चार साल में बारिश कम होती जा रही है। पूर्वी यमुना नहर खंड शामली के उपराजस्व अधिकारी अंबुज चौधरी के मुताबिक वर्ष 2019 में 362 एमएम, 2020 में 288 एमएम, वर्ष 2021 में 104 एमएम बारिश रिकार्ड दर्ज की गई। इस साल 15 जुलाई 2022 तक सिर्फ 87 एमएम बारिश हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक इस साल एक जुलाई को 73 और 14 जुलाई को 14 एमएम बारिश हुई। शामली कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक ने बताया कि धान की फसल के लिए 200-250 एमएम औसत बारिश की आवश्यकता होती है। इस बार जून में 72 एमएम और 16 जुलाई तक 87 एमएम बारिश हुई है। कम बारिश होने से धान की बढ़वार और फुटाव पर असर पडे़गा। इससे कल्ले भी कम बनेंगे। जिसके परिणामस्वरूप धान की बालियां कम बनेंगी। जिससे उत्पादन प्रभावित होगा। बारिश कम होने से दस से बीस फीसदी तक धान का उत्पादन गिर सकता है।
जिले में चार साल में हुई बारिश का ब्योरा एमएम में
जुलाई 2019 362
जुलाई 2020 288
जुलाई 2021 104
जुलाई 2022 87
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