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24 कारसेवकों की धरपकड़ के लिए पड़े थे छापे

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थानाभवन (शामली)। छह दिसंबर 1992 में मैं अपने कुछ साथियों के साथ कस्बे के आश्रम पंचतीर्थी में बैठक कर रहा था। उसी समय रेडियो पर खबर आई कि अयोध्या में विवादित ढांचे को गिरा दिया गया है और देशभर में कारसेवकों की धरपकड़ के लिए पुलिस ताबड़तोड़ छापे मार रही है। उसी समय मैं अपने साथी बाबा मदनलाल के साथ कस्बे से फरार हो गया और पानीपत पहुंच गया। यहां से हम हरिद्वार पहुंचे तो वहां हर तरफ सन्नाटा पसरा था। जैसे-तैसे हम शामली के पास सिंभालका पहुंच गए। किसी ने पुलिस को सूचना दे दी कि मैं 15 दिसंबर को थानाभवन अपने घर आ रहा हूं। हालांकि, मैने अपने आने का कार्यक्रम अचानक रद्द कर दिया और शामली में रुक गया, लेकिन रात को स्थानीय सीओ चार थानों की पुलिस के साथ मेरे घर पहुंचे और मुझे गिरफ्तार करने के लिए पूरा मोहल्ला घेर लिया था। 25 दिसंबर को स्थिति सामान्य होने के बाद घर आया। उस समय करीब 15 दिन कस्बे का माहौल कर्फ्यू से भी बदतर रहा था। 1992 में कस्बे के नगर संघ चालक रहे शंकरदास ने कुछ इस तरह से विवादित ढांचे की कहानी को अमर उजाला के साथ साझा की।
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कस्बे के नगर संघ चालक रहे शंकरदास ने बताया कि उस समय मुजफ्फरनगर जिले को तब लक्ष्मीनगर व शामली दो हिस्सों में बांट दिया गया था। शामली जिले की अगुआई पल्टूमल जैन, राजाराम, नरेंद्र, सुशील आदि लोग कर रहे थे। उस समय थानाभवन क्षेत्र से करीब 24 लोग नवंबर के आखिरी दिनों में अलग-अलग रास्तों से अयोध्या के लिए निकले। जबकि शामली जिले से करीब 140 कारसेवक अयोध्या पहुंचने के लिए निकले थे। हालांकि, इनमें अधिकांश लोग अयोध्या पहुंचनेे से पहले ही गिरफ्तार कर लिए गए। उस दौरान क्षेत्र की अगुआई में पंडित अमृतलाल, ठाकुर तेजपाल सिंह, ठाकुर महिपाल सिंह आदि ने भी प्रमुख के तौर पर अपनी भूमिका निभाई। यह लोग थानाभवन से सहारनपुर के रास्ते मेरठ होकर अयोध्या जा रहे थे। लेकिन, पुलिस ने इन तीनों लोगों को सहारनपुर से मेरठ ट्रेन के रास्ते जाते हुए बीच में ही गिरफ्तार कर लिया था। उस समय वह लोग करीब 15 दिन तक मेरठ जेल में बंद रहे।
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टार्च जलाकर पूछते थे कुशलक्षेम
थानाभवन। शंकरदास बताते हैं कि उस समय पूरे क्षेत्र में तनाव व कर्फ्यू का माहौल बना हुआ था। रात के समय अपने पक्ष के लोगों या दोस्त-रिश्तेदारों की कुशलक्षेम पूछने के लिए टार्च का इस्तेमाल किया जाता था। हर क्षेत्र के लिए टॉर्च जलाने के तरीके तय कर दिए गए थे।
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चौक बाजार पर रोक दिया था महिलाओं का जत्था
कैराना। नगर के मोहल्ला शंकर सौदिया के रहने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन नगर कार्यवाह जय प्रकाश गर्ग ने बताया कि नवंबर 1992 से ही संघ व विश्व हिंदू परिषद की बैठकें होती थी। विहिप के मंत्री राज बहादुर सिंघल, आरएसएस के स्वंय सेवक राजेंद्र फौजी, सत्यवान व नगर संघ चालक जयगोपाल शरीक होते हैं। बैठक में हुए निर्णय के बाद दो दिसंबर 1992 को उनकी टीम तथा 15-20 महिलाओं का जत्था अयोध्या में कार सेवा के लिए कैराना से चला था, लेकिन चौक बाजार में ही पुलिस ने उन्हें रोक लिया और घर लौटा दिया। छह दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद कैराना के बाजार पूरी तरह बंद हो गए थे। यहां कोई झगड़ा फसाद नहीं हुआ केवल आठ दिन तक अघोषित कर्फ्यू की स्थिति बनी रही थी। इसके बाद सब कुछ सामान्य हो गया था।
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कोठारी बंधुओं की अस्थि कलश को दी थी श्रद्धांजलि
कैराना। जय प्रकाश गर्ग ने बताया कि छह दिसंबर की घटना के करीब आठ दिन बाद कोठारी बंधुओं के दो अस्थि कलश कैराना लाए गए थे। उन्हें कटहेरा धर्मशाला में श्रद्धा के साथ रखा गया था। स्वर्गीय सुशील गर्ग एडवोकेट की अध्यक्षता में हुई श्रद्धांजलि सभा में करीब 500-600 लोगों ने श्रद्धांजलि दी थी।
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पांच अगस्त को कैराना में मनेगी दिवाली
कैराना। आरएसएस के जय प्रकाश गर्ग ने बताया कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था और भव्य राम मंदिर बनने का दशकों से चला आ रहा सपना पांच अगस्त को पूरा होने जा रहा है। शिलान्यास के दिन कैराना में भी हर घर में दीपक जलाकर खुशियां मनाई जाएंगी।
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