शामली। रसोई से निकलने वाले गीले कचरे के निस्तारण के लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत होम ड्रम कंपोस्टिंग की शुरुआत की जाएगी। शहरी क्षेत्र में जिनके घर में पौधे व बागवानी हैं, उन्हें ड्रम कंपोस्टर उपलब्ध कराए जाएंगे। होम ड्रम कंपोस्टिंग से बनने वाली जैविक खाद का बागवानी में इस्तेमाल किया जा सकेगा। नगरपालिका शुरुआत में 500 होम ड्रम कम्पोस्टर की खरीद करेगी।
बृहस्पतिवार को नगरपालिका में आयोजित कार्यक्रम में सहारनपुर से पहुंची स्वच्छ भारत मिशन की मंडल कार्यक्रम प्रबंधक जैसलीन कौर ने होम ड्रम कंपोस्टिंग के बारे में वार्ड सभासदों व पालिकाकर्मियों को जानकारी दी। उन्होंने बताया रसोई से निकलने वाले गीले कचरे से जैविक खाद तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया जिनके घरों में पौधे व छोटी बागवानी है, उनके लिए होम ड्रम कंपोस्टर कचरा वरदान की तरह से साबित होगा। इससे तैयार जैविक खाद का इस्तेमाल कर पेड़-पौधों व बगीचे को सदैव हरा-भरा रखा जा सकेगा। वार्ड सभासद और मोहल्ला स्वच्छता समिति के माध्यम से बागवानी वाले घरों को चिह्नित कर उनको होम ड्रम कंपोस्टर उपलब्ध कराया जाएगा।
नगरपालिका अध्यक्ष अरविंद संगल ने कहा कि गीले कचरे के निस्तारण के लिए होम ड्रम कंपोस्टिंग योजना शहर में सभी वार्डों में लागू कराई जाएगी। इसके लिए पालिका ने 500 होम ड्रम कंपोस्टर खरीदने की तैयारी की है। ड्रम खरीदने के कार्रवाई लगभग पूरी हो चुकी है। पालिका के अधिशासी अधिकारी रामेंद्र सिंह ने बताया भारत सरकार द्वारा पिछले दिनों स्वच्छ सर्वेक्षण में प्रदेश में 18वीं रैंक और देश में 114वीं रैंक प्राप्त हुई थी। स्वच्छ सर्वेक्षण में शामली शहर को अच्छी रैंक प्राप्त करने के लिए होम ड्रम कंपोस्टिंग का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। इस अवसर पर स्वच्छ भारत मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक आशीष गंगवार, सभासद राजीव गोयल, विनोद तोमर, अजय कुमार उर्फ बॉबी, रोबिन गर्ग, आशीष गुप्ता, संजय उपाध्याय, पंकज गुप्ता, सफाई निरीक्षक आदेश सैनी, अमित पंवार, अंकुर शर्मा, राजीव मलिक, आशु नामदेव साजिद, जेई विशाल तोमर आदि मौजूद रहे।
-
इस तरह से तैयार होगी जैविक खाद
आईटीसी मिशन सुनहरा कल के कलस्टर सुपरवाइजर सुनील कुमार ने होम ड्रम कंपोस्टिंग विधि के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि रसोई से निकलने वाले कचरे जैसे सड़े गले फल, सब्जियां और उनके छिलके, प्रयोग की जा चुकी चाय पत्ती, अंडे के छिलके, पेड़-पौधों की पत्ते, फूल, मालाएं आदि होम कंपोस्टर में डालें। बागवानी की सूखी पत्तियां, नीम के पत्ते अगर उपलब्ध हो तो इसमें मिला दें। लगभग एक सप्ताह पानी का छिड़काव करें और बैक्ट्रीरियल कल्चर दही मट्ठा का छिड़काव कर दें। इसके नीचे लगी टोंटी में एक बोतल लगा दे और ड्रम को ढक्कन से बंद करे दें। लगभग 10 से 15 दिन बाद टंकी खोले जिससे बूंद-बूंद करके एक तरल पदार्थ नीचे लगे कैन या बोतल में एकत्र होने लगेगा। पहली बार भरे हुए बोतल को वापस ड्रम में ही डाल दें। इसके एक सप्ताह बाद दोबारा एकत्र हुई तरल जैविक खाद है। तैयार जैविक खाद एक लीटर को 20 लीटर पानी में मिलाकर पौधे की जड़ों में डाले या छिड़काव करें।