- आठ किमी लंबा बाईपास सात गांव से होकर गुजरेगा
- टिटौली-टपराना के बीच लगेगा हिसार की निर्माण कंपनी का प्लांट
विकास की बात
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। पानीपत-खटीमा और मेरठ-करनाल हाईवे को जोड़ने वाले आठ किमी लंबाई के कंडेला-टपराना बाईपास की एक किमी भूमि पर निर्माण एजेंसी को कब्जा नहीं मिला है। बाईपास की भूमि पर कब्जा न मिलने से निर्माण कार्य देर से शुरू हो पाएगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय को पानीपत-खटीमा और मेरठ-करनाल हाईवे को जोड़ने के लिए कंडेला से लेकर टपराना तक आठ किमी लंबाई के शामली बाईपास का प्रस्ताव बनाकर एनएचएआई ने भेजा था। डेढ़ साल पहले मंत्रालय की ओर से बाईपास के लिए अधिसूचना जारी कर दी थी। कंडेला-टपराना बाईपास में कंडेला, शेखपुरा, गढ शाईस्तापुर, कसेरवा खुर्द, कसेरवा कलां, टिटौली और टपराना गांवों की भूमि शामिल है। नए बाईपास के निर्माण के लिए 94 करोड़ का मुआवजा निर्धारित किया गया है।
पिछले डेढ़ साल में नए बाईपास के लिए 50 करोड़ रुपये का मुआवजा किसानों को वितरित किया जा चुका है। बाईपास निर्माण के लिए हिसार की कंस्ट्रक्शन कंपनी को नामित किया गया है। निर्माण एजेंसी मेरठ-करनाल रोड पर टिटौली और सेवापुर गांव के पास प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है। एनएचएआई बागपत इकाई के अवर अभियंता जेएन मिश्रा ने बताया कि बाईपास में कंडेला से लेकर टपराना गांव की सीमा तक एक किमी भूमि पर एनएचएआई को कब्जा नहीं मिला है। जिसमें कंडेला औद्योगिक क्षेत्र में बाईपास की जद में एक औद्योगिक इकाई आ रही है। टपराना के पास बाईपास की जद में एक चहारदीवारी है। औद्योगिक इकाई का एनएचएआई से मुआवजा जारी हो चुका है। जिला प्रशासन एक किमी बाईपास की भूमि पर कब्जा नहीं दिला सका है। सात गांवों के किसानों को मुआवजा वितरित होने और भूमि पर पर कब्जा मिलने के बाद बाईपास का निर्माण शुरू हो पाएगा