कैराना। कभी नशे के लिए बदनाम भूरा गांव में युवा जागरूक हुए। उन्होंने गांव पर लगे नशे के बदनुमा दाग को धोने के लिए शिक्षा को ढाल बनाया। यहां की तीन बेटियां जज बनीं हैं तो वहीं गांव भूरा के रहने वाले सात डॉक्टर भी विभिन्न शहरों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा आर्मी व पुलिस में युवक भर्ती हो रहे हैं।
झिंझाना मार्ग पर स्थित करीब 25 हजार की मिश्रित आबादी गांव भूरा में कभी भी सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ। करीब एक दशक पहले भूरा गांव नशे के कारोबार के लिए बदनाम था। ग्रामीण नशे की दलदल में धंसे हुए थे। पुलिस रातभर दबिश देती थी। यहां लोगों में जागरुकता आई और वे नशे के खिलाफ खड़े होने लगे। कुछ परिवार ऐसे रहे हैं जिन्होंने शिक्षा को अपनी तरक्की का रास्ता बनाते हुए गांव का नाम रोशन किया।
गांव की तीन बेटियां बनीं हैं जज
भूरा के पूर्व प्रधान अहसान ने बताया कि उसकी चचेरी बहन आसिफा आगरा में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं। इसके अलावा भतीजी निशा अली उन्नाव में सिविल जज हैं। वर्तमान प्रधान पिंकी चौहान ने बताया कि उनकी चचेरी बहन राखी चौहान एटा में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं।
भूरा के सात डॉक्टर भी विभिन्न शहरों में दे रहे हैं अपनी सेवाएं
भूरा के रहने वाले डॉक्टर सलीम जावेद और उनकी डॉक्टर पत्नी का शामली में नर्सिंग होम हैं। डॉ. जमशेद अली का कैराना मेंं नर्सिंग होम हैं। डॉ. इसरार देहरादून में हॉस्पिटल चलाते हैं। डॉ. डीआर सुहैल और उनकी डॉक्टर पत्नी का दिल्ली में हॉस्पिटल है। इसके अलावा करीब 50 युवक आर्मी, बीएसएफ और अन्य पैरामिलिट्री फोर्स में है जबकि 70 के आसपास युवक यूपी और दिल्ली पुलिस में भर्ती है।
नशे पर पूरी तरह लगे रोक
पूर्व प्रधान अहसान का कहना है कि गांव में कमेटी बनाकर नशे के विरुद्ध मुहिम चलाई जाएगी। शिक्षा की धार से गांव की सभी बुराइयों का खात्मा कर देंगे।
जीशान ने बताया कि उनका बेटा जुनैद यूपी पुलिस में है। लोगों को अपने बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए।
सुहैब ने बताया कि वह एलएलबी कर रहा हैं। साथ ही यूपीएसआई की तैयारी कर रहा हैं। नशे से दूर रहकर युवाओं को शिक्षा की और ध्यान देना चाहिए।
जाबिर हसन ने बताया कि पहले नशे में घर बर्बाद हो रहे थे। लेकिन शिक्षा के कारण गांव में खुशहाली आ रही है। गांव के अधिकतर युवा अब पढ़ने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।