शामली। वैट और जीएसटी की राजस्व वसूली को लेकर राज्यकर विभाग ने अब सख्ती करनी शुरू कर दी है। शामली के 800 कारोबारी ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जिन पर 20 करोड़ से अधिक का बकाया चल रहा है। ऐसे कारोबारी, फर्म संचालकों के खाते सीज करने के लिए आरसी जारी की गई है। साथ ही बैंक शाखा प्रबंधकों को भी नेाटिस भेजकर डिफाल्टरों की जमा धनराशि को रोकने की हिदायत दी गई है। अब तक पचास के खाते सीज कराए जा चुके हैं।
दरअसल, जुलाई 2017 से पहले वैट यानी वैल्यू एडेड टैक्स में जिले के काफी संख्या में व्यापारी, कारोबारी पंजीकृत थे। इन बकायेदारों ने अपनी फर्मों का जीएसटीआईएन नंबर तो ले लिया लेकिन वैट का बकाया जमा नहीं किया। ऐसे डिफाल्टरों को 15 से अधिक बार विभागीय अधिकारियों ने नोटिस भी दिए मगर बकाया जमा नहीं किया गया।
जीएसटी विभाग के उपायुक्त धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि तीनों खंडों में करीब 800 फर्म और बकायेदार व्यापारी चिन्हित किए गए हैं।जिनके खाते सीज करने के लिए बैंक प्रबंधकों को पत्र लिखा गया है। नोटिस जारी करने को लेकर उक्त व्यापारियों में खलबली मची हुई है। नोटिस जारी करने के लिए तीन टीमों को लगाया गया है। अन्य बकायेदार भी चिन्हित किए जा रहे हैं।संवाद
आरसी नंबर भी उपलब्ध कराया जा रहा
अधिकारियों के अनुसार,बैंक प्रबंधकों को दिए जा रहे नोटिस में फर्म का नाम, टिन नंबर, जीएसटी नंबर और खाता नंबर भेजा जा रहा है। साथ ही आरसी नंबर भी बताया जा रहा है। ताकि जल्द से जल्द खाता सीज की कार्रवाई की जाए।
पचास हजार से अधिक वालों को भेजे गए नोटिस
हाल ही में विभागीय अधिकारियों ने पचास हजार से अधिक वालों को नोटिस भेजे हैं। हालांकि, इनमें कुछ एक हजार से अधिक के बकायेदार भी शामिल हैं। बकाया जमा होने पर नोटिस को अधिकारियों के निर्देश पर कैंसिल कर दिया जाता है।
एआई के माध्यम से दस मामले पकड़े
विभागीय अधिकारियों ने जीएसटी रिटर्न में गड़बड़ी करने के 10 मामलों को एआई सॉफ्टवेयर के माध्यम से भी पकड़ा है। अन्य मामलों में भी एआई की मदद ली जा रही है। एआई गड़बड़ी करने वालों पर शिकंजा कसने में अहम भूमिका निभा रही है। तीनों खंडों में अधिकारियों को एआई की ट्रेनिंग दी जा चुकी है।