नकल माफिया के आगे प्रदेश सरकार की यूपी बोर्ड परीक्षा में सख्ती और पारदर्शिता के तमाम दावों की धज्जियां उड़ गई हैं। शनिवार को घोषित परीक्षा परिणाम में एक परीक्षा केंद्र के 573 विद्यार्थियों को भौतिक विज्ञान विषय में समान अंक 52-52 मिले हैं। जिले के जनता इंटर कॉलेज बाढ़ में एसटीएफ ने इसी पेपर में सामूहिक नकल का पर्दाफाश किया था। खुलासे के बाद यह परीक्षा निरस्त कर दी गई थी। पुन: नए केंद्र पर फिजिक्स का पेपर लिया गया था।
22 फरवरी को डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा के निर्देश पर एसटीएफ ने छापे की कार्रवाई कर चरथावल ब्लाक के जनता इंटर कॉलेज बाढ़ में सामूहिक नकल पकड़ी थी। एसटीएफ ने केंद्र व्यवस्थापक एवं प्रधानाचार्य योगेंद्र पाल सिंह और डॉ जाकिर हुसैन मेमोरियल इंटर कॉलेज के प्रबंधक कमर इंतखाब और उनके भाई असहर उर्फ अख्तर सहित 17 आरोपियों को जेल भेजा था। खुलासे के बाद डीएम अजय शंकर पांडेय की रिपोर्ट पर शासन ने फिजिक्स विषय की परीक्षा निरस्त कर दी थी। गलत परीक्षा केंद्र बनाए जाने को लेकर डीआईओएस प्रवीण मिश्रा का तबादला प्रयागराज कर दिया गया था, हालांकि अभी तक चार्ज उन्हीं के पास है। गैर राज्य और गैर बोर्ड के इंटरमीडिएट के 623 छात्र-छात्राओं की यह परीक्षा पुन: आठ मार्च को जीआईसी मुजफ्फरनगर में कराई गई। माफिया ने मिली भगत कर फिजिक्स विषय में अभ्यर्थियों को पास कराने का बड़ा खेल कर दिया। शनिवार को 12वीं का रिजल्ट घोषित हुआ तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। 623 विद्यार्थियों में से 573 को मार्कशीट में समान अंक 52-52 मिले हैं। 50 अन्य विद्यार्थियों के अंक भी 50 से 56 के बीच हैं। हैरत की बात यह भी है कि सामूहिक नकल का मामला सुर्खियों में आने के बाद प्रशासन की देखरेख में जनता इंटर कॉलेज बाढ़ के परीक्षा केंद्र पर गणित विषय की परीक्षा हुई थी, जिसमें उपरोक्त 166 विद्यार्थी फेल हो गए हैं। डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को नकल माफिया की शिकायत करने वाले रविंद्र सिंह का आरोप है कि 573 छात्र-छात्राओं के 52-52 अंक कैसे आ गए, इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। बताते चले कि राजकीय हाई स्कूल रोनी हरजीपुर और राजकीय इंटर कॉलेज मुथरा से नकल माफिया ने गैर राज्य और गैर बोर्ड के परीक्षार्थियों के फार्म भरवाए थे।