शामली के कैराना में मदरसा नासिरुल उलूम अशरफिया में 13 बच्चों के कुरान शरीफ मुकम्मल होने पर शिक्षा के महत्व पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें उलमा ने कामयाबी के लिए अपने बच्चों को दीनी शिक्षा दिलाने पर जोर दिया। मां को सबसे बड़ा मदरसा बताया।
मोहल्ला आलकलां बारहदरी स्थित मदरसा अरबिया नासिरुल उलूम में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ यासिर की कुरान ख्वानी और हाशिम की नात-ए-पाक से हुआ। मौलाना इलियास ने कहा कि पवित्र कुरान अल्लाह का कलाम है, जिसको आसमान से 1400 वर्ष पहले हजरत पैगंबर साहब पर नाजिल किया गया था। उन्होंने कहा कि कुरान को पढ़ने-पढ़ाने तथा सीखने-सिखाने वाले लोग बड़े ही खुशनसीब होते हैं। अपने अंदर अल्लाह का खौफ पैदा करें और दीन की राह पर चलें। मदरसा प्रबंधक कारी इजराइल ने कहा कि संसार में पवित्र कुरान करीम से बढ़कर कोई दौलत नहीं है। बच्चों की शिक्षा के लिए घर में मां सबसे बड़ा मदरसा है। मां के जरिये पूरा परिवार शिक्षित हो सकता है। उन्होंने लोगों से अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का समापन कारी इजराइल की विश्व शांति, राष्ट्र एकता एवं अखंडता, उन्नति, खुशहाली आदि की विशेष दुआओं के साथ हुआ। इस अवसर पर कुरान मुकम्मल करने वाले सुहेल, फैसल, अहसान, जीशान, दानिश, सैफुल्लाह, मोहम्मद, अनस, मुस्कान, सइमा, अनम, सदफ समेत नौ लड़के और चार लड़कियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी कामना की गई। मदरसा संचालक मुफ्ती नासिर ने सभी को धन्यवाद किया। मौके पर मौलाना अब्दुल अजीम जलालाबाद, मौलाना फैज मोहम्मद, हाजी रईसुद्दीन, मास्टर असगर कांधला, हाजी खलीील, हाजी रईस, हाजी सगीर, मौलाना महताब कासमी आदि मौजूद रहे।